राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

महाराष्ट्र में उर्वरक नियमन में सुधार: निरीक्षण प्रणाली, ‘लिंकिंग’ पर रोक और गुणवत्ता नियंत्रण उपायों का उद्योग ने किया स्वागत

02 मई 2026, नई दिल्ली: महाराष्ट्र में उर्वरक नियमन में सुधार: निरीक्षण प्रणाली, ‘लिंकिंग’ पर रोक और गुणवत्ता नियंत्रण उपायों का उद्योग ने किया स्वागत – महाराष्ट्र सरकार द्वारा 28 अप्रैल 2026 को मुंबई के मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए निर्णयों का देश के उर्वरक उद्योग ने स्वागत किया है। उद्योग संगठनों के अनुसार ये कदम कृषि-इनपुट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने, नियामकीय दोहराव कम करने और गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करने की दिशा में व्यावहारिक पहल हैं।

इन सुधारों का मुख्य केंद्र गुणवत्ता नियंत्रण (IQC) निरीक्षण प्रणाली का पुनर्गठन है। नई व्यवस्था में तालुका, जिला, संभाग और राज्य स्तर पर जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे लंबे समय से चली आ रही निरीक्षण की दोहराव और अत्यधिक हस्तक्षेप की समस्या को दूर करने का प्रयास किया गया है। निरीक्षकों की भूमिकाओं को सुव्यवस्थित करते हुए आवश्यकता के अनुसार अंशकालिक निरीक्षकों की व्यवस्था भी शामिल की गई है। इससे निरीक्षण अधिक प्रभावी और लक्षित होने की उम्मीद है।

नई निरीक्षण प्रणाली को अधिक व्यावहारिक और तकनीक-सक्षम बनाया गया है। अब निरीक्षण योजना-आधारित और आवश्यकता-आधारित होंगे, जिन्हें IFMS और SATHI जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का समर्थन मिलेगा। इसके साथ ही रैंडम निरीक्षण और लॉट-आधारित सैंपलिंग जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी, जिससे अनुपालन मजबूत होगा और अनावश्यक व्यवधान कम होंगे। उच्च स्तर पर निगरानी को भी मजबूत किया गया है ताकि बेहतर समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

एक महत्वपूर्ण निर्णय गैर-सब्सिडी वाले उत्पादों को सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ जबरन जोड़ने (लिंकिंग) पर प्रस्तावित प्रतिबंध है। यह मुद्दा लंबे समय से उद्योग और डीलरों द्वारा उठाया जाता रहा है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश जैसी नीति को महाराष्ट्र में लागू करने पर विचार किया जा रहा है और जल्द ही इसकी अधिसूचना आने की संभावना है।

सरकार ने कालाबाजारी, जमाखोरी और नकली कृषि-इनपुट की समस्या पर भी सख्ती दिखाने के संकेत दिए हैं। खुदरा स्तर पर शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने और किसानों में जागरूकता बढ़ाने के उपायों से जमीनी स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

उद्योग के विभिन्न प्रतिनिधियों ने इन सुधारों का समर्थन किया है। सॉल्यूबल फर्टिलाइजर इंडस्ट्री एसोसिएशन के राजीब चक्रवर्ती ने निरीक्षण प्रणाली के पुनर्गठन और लिंकिंग पर रोक को समय की जरूरत बताया। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में व्यवसाय, उत्पाद और स्रोत पंजीकरण से जुड़ी विवेकाधीन प्रक्रियाओं की समीक्षा आवश्यक है, खासकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितताओं और एल नीनो जैसी जलवायु चुनौतियों के मद्देनजर।

एसएफआईए के नीति सलाहकार और IPNM SPC के संयोजक डॉ. सुहास बुधे ने संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति बाधाओं से निपटने के लिए तैयार रहना जरूरी है और वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा देने के लिए देश में विशेष एवं जैविक पोषक उत्पादों के घरेलू निर्माण को मजबूत करना होगा, जो फिलहाल नियामकीय दबावों से प्रभावित है।

इंडियन माइक्रो फर्टिलाइजर इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राहुल मिर्चंदानी ने निरीक्षकों की शक्तियों को सीमित कर एक संतुलित और पारदर्शी व्यवस्था बनाने के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कदम उद्योग के लिए अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमेय नियामकीय वातावरण तैयार करेगा।

डीलर समुदाय ने भी इन फैसलों का स्वागत किया है। महाराष्ट्र ऑल इंडिया डीलर एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के महासचिव विपिन कासलीवाल ने कहा कि सरकार ने लंबे समय से लंबित मांगों को स्वीकार किया है और इनका शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित होना चाहिए ताकि लाभ सीधे किसानों और डीलरों तक पहुंचे।

बैठक में उर्वरक क्षेत्र के अलावा अन्य कृषि-इनपुट से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिनमें SATHI पोर्टल में सुधार, अवैध बीजों के खिलाफ कार्रवाई, एक्सपायर्ड कीटनाशकों के निपटान की व्यवस्था, डीलरों की समस्याएं और राज्यों के बीच नकली कृषि उत्पादों की आवाजाही को रोकने के उपाय शामिल हैं।

कुल मिलाकर, इन निर्णयों को उद्योग ने एक सकारात्मक कदम बताया है, जो एक अधिक पारदर्शी, कुशल और किसान-केंद्रित कृषि-इनपुट प्रणाली के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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