राज्य कृषि समाचार (State News)

रायपुर: वनांचल में खेती का नया मॉडल, क्लस्टर आधारित कृषि से किसानों को मिलेगा ज्यादा मुनाफा

26 मई 2026, रायपुर: रायपुर: वनांचल में खेती का नया मॉडल, क्लस्टर आधारित कृषि से किसानों को मिलेगा ज्यादा मुनाफा – छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के विकासखंड ओरछा अंतर्गत सुदूर ग्राम कच्चापाल में पारंपरिक परिवेश और आधुनिक कृषि सोच का अनूठा संगम देखने को मिला। अबूझमाड़ क्षेत्र के इस वनांचल गांव में हाल ही में कृषि, उद्यानिकी और पशुपालन विभाग द्वारा विशेष मैदानी संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें किसानों को क्लस्टर आधारित खेती, आधुनिक कृषि तकनीक और आय बढ़ाने के नए उपायों की जानकारी दी गई।

घोटूल जैसे पारंपरिक सामुदायिक केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों और अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर खेती, पशुपालन और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य वनांचल के किसानों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना था।

क्लस्टर खेती को बताया फायदे का सौदा

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर क्लस्टर आधारित कृषि प्रणाली अपनाने की सलाह दी। किसानों को बताया गया कि अलग-अलग छोटे स्तर पर खेती करने के बजाय समूह बनाकर एक जैसी फसलें उगाने से लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है।

विशेषज्ञों ने समझाया कि सामूहिक खेती से खाद, बीज और परिवहन जैसी लागत आपस में बंट जाती है। साथ ही आधुनिक कृषि यंत्रों और तकनीकों का उपयोग भी आसान हो जाता है। इससे किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ती है और बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है।

अब सिर्फ धान नहीं, फल-सब्जी और पशुपालन पर भी जोर

वनांचल के किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि, उद्यानिकी और पशुपालन विभाग ने संयुक्त रूप से विविधीकृत खेती का मॉडल प्रस्तुत किया। अधिकारियों ने स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार किसानों को फल, नकदी सब्जियों और बागवानी फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया।

इसके अलावा वैज्ञानिक पशुपालन, डेयरी विकास, नियमित टीकाकरण और बैकयार्ड मुर्गीपालन जैसी गतिविधियों की जानकारी भी दी गई, ताकि किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो सकें। किसानों को जैविक खेती, जल संरक्षण और बेहतर सिंचाई प्रबंधन के लाभों से भी अवगत कराया गया।

घोटूल में सुनी गई किसानों की समस्याएं

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि अधिकारियों ने केवल योजनाओं की जानकारी देने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि किसानों की समस्याओं को भी गंभीरता से सुना। घोटूल में आयोजित खुले संवाद के दौरान किसानों ने उन्नत बीज, कृषि इनपुट्स और जल संरक्षण के लिए तालाब निर्माण जैसी जरूरतें अधिकारियों के सामने रखीं।

अधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों पर प्राथमिकता के साथ कार्रवाई की जाएगी और उन्हें निरंतर तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा वनांचल

कच्चापाल में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण बनकर सामने आया है कि यदि सरकारी योजनाएं सीधे गांव और खेत तक पहुंचें, तो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। आधुनिक तकनीक, सामूहिक खेती और विविधीकृत कृषि मॉडल को अपनाकर अबूझमाड़ क्षेत्र के किसान आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्लस्टर आधारित खेती और आधुनिक कृषि पद्धतियों के जरिए वनांचल क्षेत्रों में भी किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है।

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