नौकरी छोड़ खेती को चुना, अब चिया-किनोवा को उगाकर कमा रहीं लाखों; सैकड़ों किसानों की बनीं प्रेरणा
16 जून 2026, भोपाल: नौकरी छोड़ खेती को चुना, अब चिया-किनोवा को उगाकर कमा रहीं लाखों; सैकड़ों किसानों की बनीं प्रेरणा – ग्रामीण भारत में कृषि को केवल आजीविका नहीं, बल्कि एक सफल व्यवसाय के रूप में स्थापित करने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मध्यप्रदेश के मंडला जिले के बीजाडांडी विकासखंड के ग्राम लावर मुड़िया की निवासी गीता तेकाम ऐसी ही प्रगतिशील महिला किसान हैं, जिन्होंने आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती के समन्वय से अपनी पहचान बनाई है। आज वह न केवल खेती से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुकी हैं।
नौकरी के बजाय खेती को बनाया करियर
स्नातकोत्तर (एमए) शिक्षित गीता तेकाम के सामने रोजगार के कई विकल्प थे, लेकिन उन्होंने खेती को अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। दृढ़ संकल्प और नई तकनीकों को सीखने की इच्छा के साथ उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया। गीता का मानना है कि तकनीकी नवाचार और प्राकृतिक खेती का मेल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विभागीय मार्गदर्शन से मिली नई दिशा
गीता तेकाम की सफलता में कृषि विभाग और आत्मा परियोजना का अहम योगदान रहा। विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर उन्होंने जैविक खेती, उन्नत बीज चयन, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन और जैविक कीट नियंत्रण जैसी तकनीकों को अपनाया। आत्मा योजना के सहायक तकनीकी प्रबंधक मोहित गोल्हानी के मार्गदर्शन से उनकी खेती की उत्पादकता और गुणवत्ता में लगातार सुधार हुआ।
चिया और किनोवा की खेती से बढ़ी आय
पारंपरिक फसलों तक सीमित रहने के बजाय गीता तेकाम ने बाजार की मांग को समझते हुए चिया सीड और किनोवा जैसी उच्च मूल्य वाली सुपरफूड फसलों की खेती शुरू की। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों की जगह जीवामृत, घनजीवामृत और जैविक खादों का उपयोग किया। साथ ही मिश्रित और बहुफसली खेती अपनाकर उत्पादन लागत कम की और खेती को अधिक टिकाऊ बनाया।
125 किसानों को दे रहीं प्रशिक्षण
गीता तेकाम की कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत कृषि सखी के रूप में चुना गया। वर्तमान में वह अपने गांव और आसपास के करीब 125 किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दे रही हैं। उनकी पहल से क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ी है और कई किसान कम लागत वाली खेती की ओर अग्रसर हुए हैं।
3 लाख रुपये से अधिक का सालाना लाभ
आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती और बेहतर प्रबंधन के बल पर गीता तेकाम ने अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। उनकी कुल वार्षिक सकल आय 4,06,850 रुपये रही, जबकि उत्पादन लागत 1,04,000 रुपये रही। इस तरह उन्हें 3,02,850 रुपये का शुद्ध वार्षिक लाभ प्राप्त हुआ।
महिला किसानों के लिए बनीं मिसाल
कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए गीता तेकाम को आत्मा योजना के तहत जिला स्तरीय प्रगतिशील महिला कृषक सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों, सरकारी योजनाओं और प्राकृतिक खेती को अपनाएं तो सीमित संसाधनों में भी खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। आज गीता तेकाम मंडला जिले की ही नहीं, बल्कि प्रदेशभर की महिला किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
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