नासिक के प्रताप बनकर ने एक एकड़ में उगाईं 40 फसलें, रोज कमा रहे 1,200 रुपये शुद्ध मुनाफा
03 नवंबर 2026, जिंदोरी (नासिक): नासिक के प्रताप बनकर ने एक एकड़ में उगाईं 40 फसलें, रोज कमा रहे 1,200 रुपये शुद्ध मुनाफा – महाराष्ट्र के नासिक जिले के जिंदोरी गांव में रहने वाले 48 वर्षीय किसान प्रताप निवृत्ति बनकर एक एकड़ जमीन पर 40 से ज्यादा फसलें एक साथ उगा रहे हैं। वे पूरी तरह रासायनिक-मुक्त प्राकृतिक खेती करते हैं और रोजाना करीब 1,200 रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।
प्रताप के पास कुल 42 एकड़ जमीन है। उनके पास 40 देसी गायें भी हैं, जिनके गोबर और मूत्र से वे जीवामृत, घन जीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे घरेलू खाद व कीटनाशक बनाते हैं। इन सभी तैयारियों में गाय का गोबर-मूत्र, गुड़ और बेसन जैसी आसानी से मिलने वाली चीजों का इस्तेमाल होता है, जिससे किसान को बाहर से खाद-दवा खरीदने की जरूरत बहुत कम पड़ती है।
रासायनिक खेती छोड़कर अपनाई बहु-स्तरीय पद्धति
कॉलेज की पढ़ाई के बाद प्रताप ने 6-7 साल तक रासायनिक खेती की। इस दौरान खर्च लगातार बढ़ता रहा और मिट्टी की सेहत कमजोर होती गई। वे बताते हैं, “खर्च बढ़ रहे थे, मिट्टी कमजोर हो रही थी और मैं लगातार बेचैन रहता था।”
2008 में बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग के एक प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने के बाद उन्होंने प्राकृतिक खेती के बारे में सीखा। 2009 में उन्होंने अपनी एक एकड़ जमीन पर यह तरीका अपनाना शुरू किया, जो धीरे-धीरे उनकी मुख्य पहचान बन गया। इस सफर में आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़े कृषि वैज्ञानिक दिवंगत दीपक सचदेवा को उन्होंने अपना मार्गदर्शक बताया है।
प्रताप की पद्धति में एक ही एकड़ में कई परतों (मल्टी-लेयर) में फसलें लगाई जाती हैं—ऊंचाई वाली, मध्यम और जमीन से सटी फसलें एक साथ उगती हैं, जिससे जगह का पूरा इस्तेमाल होता है और मिट्टी हमेशा ढकी रहती है। देसी बीजों का इस्तेमाल और गाय आधारित खाद-कीटनाशक इस तरीके का आधार हैं।
एक एकड़ से 100 क्विंटल उपज, बाजार में सीधी बिक्री
प्रताप अपने इस एक एकड़ खेत से पालक, मेथी, धनिया, भिंडी, करेला, गाजर, पपीता जैसी सब्जियों के साथ गेहूं, ज्वार, बाजरा और धान की कई किस्में भी उगाते हैं। वे दावा करते हैं, “एक एकड़ में, मैं 100 क्विंटल फसल पैदा करता हूं।”
वे रोजाना लगभग 50 किलो मिश्रित उपज बाजार में बेचते हैं, जिससे खर्च निकालने के बाद करीब 1,200 रुपये का शुद्ध मुनाफा होता है। प्रताप यह भी दावा करते हैं कि उनके खेत की पालक में आयरन की मात्रा सामान्य से कई गुना ज्यादा है, हालांकि यह दावा किसी स्वतंत्र प्रयोगशाला जांच से प्रमाणित नहीं है।
प्रताप के मुताबिक, मल्टी-लेयर खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक ही जमीन से पूरे साल अलग-अलग मौसम की फसलें मिलती रहती हैं, जिससे किसी एक फसल के बाजार भाव गिरने पर भी पूरी आमदनी पर असर नहीं पड़ता। वे मानते हैं कि छोटे किसानों के लिए यह तरीका रासायनिक खेती के मुकाबले कम जोखिम वाला और ज्यादा टिकाऊ है, क्योंकि लागत बहुत कम रहती है और मिट्टी की उर्वरता भी समय के साथ बढ़ती है।
नासिक शहर में उन्होंने एक दुकान भी खोली है, जहां वे अपनी उपज के साथ-साथ दूसरे प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों का उत्पाद भी बिकवाते हैं। दुकान में हर पखवाड़े नाड़ी परीक्षण शिविर भी लगता है। वे अन्य किसानों की उपज तय दर पर खरीदने की पेशकश भी करते हैं, ताकि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले नए किसानों को शुरुआत में बाजार मिलने की चिंता न रहे। वे कहते हैं, “किसी को भी वे नुकसान नहीं उठाने चाहिए, जो मैंने उठाए थे।”
प्रताप के लिए खेती सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि एक जीवन-पद्धति बन गई है। वे कहते हैं, “खेती सिर्फ रोजी-रोटी का साधन नहीं है।” वे अपने अनुभव के आधार पर अलग-अलग सब्जियों के पोषण संबंधी फायदे भी बताते हैं, जैसे अमरूद और भिंडी को मसूड़ों की सेहत के लिए, हालांकि ऐसे दावे उनके अपने अनुभव पर आधारित हैं और किसी चिकित्सकीय जांच से प्रमाणित नहीं हैं।
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