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राज्य कृषि समाचार (State News)

बिहार में सात साल बाद फिर लागू होगी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, रबी सीजन से पंजीयन शुरू

07 अक्टूबर 2026, पटना: बिहार में सात साल बाद फिर लागू होगी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, रबी सीजन से पंजीयन शुरू – बिहार में किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) करीब सात साल बाद दोबारा लागू होने जा रही है। राज्य सरकार ने यह फैसला रबी सीजन 2026-27 से लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत किसान आने वाले महीनों में अपनी रबी फसलों का बीमा करा सकेंगे।

राज्य के सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने हाल ही में इस योजना को लागू करने की तैयारियों की समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को समय पर सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए। बिहार में यह योजना पहले बंद कर दी गई थी और राज्य सरकार अपनी अलग फसल सहायता योजना चला रही थी, लेकिन अब केंद्र की इस योजना को फिर अपनाया जा रहा है।

बिहार उन राज्यों में शामिल है जहां फसल बीमा योजना बंद होने के बावजूद किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का सामना बार-बार करना पड़ा है। राज्य सरकार की अपनी फसल सहायता योजना में मुआवजे की रफ्तार और राशि को लेकर किसान संगठन लंबे समय से असंतोष जताते रहे हैं, जिसके बाद केंद्र की इस बीमा योजना को फिर अपनाने का रास्ता तैयार किया गया।

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कब से शुरू होगा पंजीयन और कितना लगेगा प्रीमियम

योजना के तहत किसानों से आवेदन 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 के बीच लिए जाने का प्रस्ताव है। इस अवधि में किसान अपने नजदीकी बैंक शाखा, सामान्य सेवा केंद्र या बीमा कंपनी के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे।

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प्रीमियम दरें फसल के प्रकार के हिसाब से तय की गई हैं। रबी फसलों के लिए किसानों को अधिकतम 1.5 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा, जबकि खरीफ फसलों के लिए यह दर अधिकतम 2 प्रतिशत रहेगी। व्यावसायिक और बागवानी फसलों के लिए प्रीमियम दर अधिकतम 5 प्रतिशत तय की गई है। बाकी प्रीमियम राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करेंगी, जैसा कि योजना के मूल ढांचे में तय है।

एक राज्य स्तरीय समिति इस बात पर फैसला करेगी कि किन फसलों को बीमा के दायरे में शामिल किया जाएगा। प्राकृतिक आपदा, सूखा, बाढ़ या अन्य तय जोखिमों से फसल को नुकसान होने पर किसानों को फसल कटाई प्रयोगों के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। किसान हेल्पलाइन नंबर 14447 और 1800-3454-110 पर योजना से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं।

बिहार में पिछले कुछ वर्षों में बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं से फसलों को बार-बार नुकसान पहुंचा है, जिसके बाद से किसान संगठन लगातार फसल बीमा योजना की वापसी की मांग कर रहे थे। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंजीयन शुरू होने से पहले बैंकों और बीमा कंपनियों के साथ समन्वय का काम पूरा कर लिया जाएगा ताकि किसानों को आवेदन में दिक्कत न हो।

किसानों को क्या करनी होगी तैयारी

पंजीयन शुरू होने से पहले किसानों को अपने जमीन के कागजात, आधार कार्ड और बैंक खाता संबंधी जानकारी अपडेट रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि बीमा राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है। जिन किसानों ने फसल ऋण लिया है, उनके लिए बीमा की प्रक्रिया बैंक के माध्यम से अपेक्षाकृत आसान रहती है, जबकि अन्य किसानों को खुद आवेदन करना होगा।

सहकारिता विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंजीयन से पहले जिलावार कार्यशालाएं आयोजित कर किसानों को योजना की बारीकियां समझाई जाएंगी। राज्य सरकार की कोशिश है कि पिछली बार योजना बंद होने के दौरान जो भ्रम की स्थिति बनी थी, उसे इस बार दूर किया जाए और अधिक से अधिक किसान समय रहते पंजीयन करा सकें।

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