Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

चलते-चलते लगाइए धान: किसानों की मेहनत को बनाएगा आसान वॉकिंग राइस ट्रांसप्लांटर

02 अगस्त 2024, शहडोल: चलते-चलते लगाइए धान: किसानों की मेहनत को बनाएगा आसान वॉकिंग राइस ट्रांसप्लांटर – मध्यप्रदेश के शहडोल में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक दीपक चौहान और कृषि अभियांत्रिकी विभाग के सहायक कृषि अभियंता रितेश प्यासी ने लालपुर गांव के एक किसान के खेत में धान की रोपाई के लिए वॉकिंग टाइप राइस ट्रांसप्लांटर का सफल प्रदर्शन किया।

वैज्ञानिक दीपक चौहान ने ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव के लिए आए रिलायंस फाउंडेशन के क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं, किसानों और कृषि महाविद्यालय के विद्यार्थियों को वॉकिंग टाइप राइस ट्रांसप्लांटर के बारे में विस्तार से बताया कि वॉकिंग टाइप राइस ट्रांसप्लांटर को ऑपरेटर द्वारा हाथों से धकेला जाता है। इसमें एक रोपण तंत्र शामिल है जो छत की नर्सरी से पौधों को लेता है और उन्हें मिट्टी में रोपता है। इस मशीन को चलाते समय, कर्मचारी फसलों के बीच भी चल सकता है। अंत तक पहुंचने पर, ऑपरेटर इसे घुमाते हुए ट्रांसप्लांटर को थोड़ा ऊपर उठाता है। चावल के पौधे को खींचा जा सकता है ताकि कोई भी अंकुर बर्बाद न हो।

यह ट्रांसप्लांटर एक बार में चार से छह पंक्तियों तक धान की रोपाई कर सकता है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है। इसके अलावा, इस मशीन का रखरखाव भी बेहद किफायती है। धान ट्रांसप्लांटर मुख्य रूप से तीन भागों में बंटा होता है: मोटर, रनिंग गियर, और ट्रांसप्लांटर डिवाइस।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

इस अवसर पर, वैज्ञानिकों ने बताया कि पारंपरिक तरीकों की तुलना में, यह मशीन धान की रोपाई को सरल, तेज और कुशल बनाती है। इस मशीन का उपयोग धान की खेती में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, जिससे किसानों को समय पर और प्रभावी ढंग से फसल रोपाई करने में मदद मिलेगी।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

धान रोपाई मशीन में मूवर, ट्रांसमिशन, इंजन, लुग्ड व्हील, सीडलिंग ट्रे (जिसमें धान के बीजों के बंडल होते हैं), सीडलिंग ट्रे शिफ्टर और पिक-अप डिवाइस जैसे कि प्लूरल पिक-अप फोर्क्स होते हैं। सीडिंग ट्रे शेड की छत की तरह होती है, जहाँ मैट टाइप राइस नर्सरी लगाई जाती है। जब राइस प्लांटर को खेत में लाया जाता है, तो पौधों को सीडलिंग ट्रे में डाल दिया जाता है। फिर ट्रे टाइपराइटर कार्ट की तरह पौधों को हिलाती है क्योंकि पिकअप फोर्क्स पौधों को ट्रे से खींचकर जमीन में रख देते हैं। पिकर्स ट्रे से पौधे लेकर उन्हें जमीन में धकेलकर इंसानों की तरह काम करते हैं।

इस प्रदर्शन के दौरान रिलायंस फाउंडेशन के क्षेत्रीय कार्यकर्ता, किसान और कृषि महाविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित थे। इस मशीन के सफल प्रदर्शन ने धान की खेती में नई संभावनाओं को जन्म दिया है।

(नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़,  टेलीग्राम, व्हाट्सएप्प)

(कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें)

कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

www.krishakjagat.org/kj_epaper/

कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

www.global-agriculture.com