भारतीय किसान यूनियन द्वारा इंदौर ईस्टर्न बाईपास भूमि अधिग्रहण के खिलाफ याचिका दायर
उच्च न्यायालय इंदौर द्वारा स्थगन आदेश जारी
02 जुलाई 2026, इंदौर: भारतीय किसान यूनियन द्वारा इंदौर ईस्टर्न बाईपास भूमि अधिग्रहण के खिलाफ याचिका दायर – भारतीय किसान यूनियन (सूर्यवंशी) द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा इंदौर ईस्टर्न बाईपास भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।जिसमें बिना स्पष्ट सीमांकन और खसरा विवरण के उपजाऊ कृषि भूमि के मनमाने अधिग्रहण को चुनौती दी गई है। संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सपना भरोसिया के नेतृत्व में जन हित याचिका इंदौर उच्च न्यायालय दायर की गई है, जिसमें उच्च न्यायालय द्वारा किसान यूनियन के पक्ष में स्थगन आदेश जारी किया गया है।
इस संबंध में भारतीय किसान यूनियन ( सूर्यवंशी ) की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सपना भरोसिया ने कृषक जगत को बताया कि इंदौर ईस्टर्न बायपास भूमि अधिग्रहण से मालवा की उपजाऊ मिट्टी और कम हो जाएगी और 44 गांवों की 700 हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंहस्थ के लिए रिंग रोड़ नाम से अधिग्रहित किए जाने से इंदौर और देवास जिले के 1200 किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। जबकि इस रिंग रोड़ की ज़रूरत ही नहीं है। किसान यूनियन की इस जन हित याचिका पर याचिकाकर्ता के अभिभाषक श्री अजय बागड़िया एवं पूर्वा महाजन के तर्कों से सहमत होते हुए माननीय इंदौर उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश जारी किया है।
याचिका के प्रमुख मुद्दे –
अस्पष्ट और दोषपूर्ण अधिसूचनाएं – प्रस्तुत याचिका में प्रमुख मुद्दे और आपत्तियों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि मंत्रालय द्वारा 23 सितंबर 2025 से 29 दिसंबर 2025 के बीच जारी की गई प्रारंभिक अधिसूचनाएं (धारा 3A के तहत) पूरी तरह से अस्पष्ट हैं। इनमें अधिग्रहण की जाने वाली 301 भूमि संपत्तियों का सटीक हिस्सा, उप-विभाजन (खसरा विवरण) या सीमाएं निर्धारित नहीं की गई हैं, जिससे किसानों को अपनी जमीन के सही मूल्यांकन और आपत्तियां दर्ज करने के कानूनी अधिकार (धारा 3-C) से वंचित होना पड़ रहा है।
अत्यधिक उपजाऊ भूमि का विनाश: अधिग्रहित की जा रही भूमि मालवा क्षेत्र की सबसे उपजाऊ (चार फसलें देने वाली) सिंचित भूमि है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात होने वाले प्रीमियम गुणवत्ता के गेहूं और आलू उगाए जाते हैं। आरोप है कि सरकार ने सरकारी और बंजर जमीनों को छोड़कर जानबूझकर किसानों की इस बहुमूल्य निजी भूमि को निशाना बनाया है।
गलत अलाइनमेंट और मार्ग में हेरफेर: याचिका के अनुसार, बाईपास के लिए 7.5 किमी के सीधे और छोटे मार्ग के बजाय जानबूझकर 9.7 किमी का लंबा और घुमावदार रास्ता (सर्किट रूट) तय किया गया है, ताकि किसानों की अतिरिक्त जमीनों को जबरन अधिग्रहित किया जा सके।
सिंहस्थ 2028 के नाम पर भ्रामक उद्देश्य: अधिसूचना में इस परियोजना को ‘इंदौर ईस्टर्न बाईपास’ बताया गया है, जबकि वास्तव में यह उज्जैन और बैतूल को जोड़ने वाला 338 किमी लंबा मार्ग है, जिसे मुख्य रूप से सिंहस्थ 2028 के लिए लगभग ₹6,500 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है।
किसानों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न: साल 2023 से ही इन जमीनों की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगाकर बाजार मूल्य को कृत्रिम रूप से घटा दिया गया है, जिससे किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। इस अनिश्चितता और आर्थिक संकट के कारण कई किसान गंभीर मानसिक आघात, दिल के दौरे और पक्षाघात (पैरालिसिस) का शिकार हुए हैं, और कुछ ने आत्महत्या तक का प्रयास किया है। इस परियोजना से इंदौर और देवास जिले के 44 गांवों की लगभग 2,800 बीघा (700 हेक्टेयर) कृषि भूमि प्रभावित हो रही है, जिससे 1200 किसान परिवारों की आजीविका छिन जाएगी और लगभग 5,000 परिवार विस्थापित होंगे।
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