पंजाब में धान खरीद घटी, बदल रहा देश की सरकारी खरीद का भूगोल
14 अगस्त 2026, नई दिल्ली: पंजाब में धान खरीद घटी, बदल रहा देश की सरकारी खरीद का भूगोल – देश में धान और चावल उत्पादन के प्रमुख केंद्र रहे पंजाब में इस वर्ष सरकारी धान खरीद में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय पूल के लिए हुई खरीद के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में धान की खरीद पिछले सीजन के मुकाबले 9.7 प्रतिशत घटकर 116.13 लाख टन से 104.86 लाख टन रह गई है। दूसरी ओर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सरकारी खरीद में वृद्धि हुई है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि देश में सरकारी धान खरीद का पारंपरिक भूगोल धीरे-धीरे बदल रहा है।
भारतीय खाद्य निगम (FCI) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर से 4 अगस्त तक पंजाब से केंद्रीय पूल के लिए 104.86 लाख टन धान खरीदा गया। पिछले सीजन की इसी अवधि में यह आंकड़ा 116.13 लाख टन था। पंजाब लंबे समय से देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली और केंद्रीय खाद्यान्न भंडार के लिए धान खरीद का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ऐसे में खरीद में आई कमी केवल राज्य के किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि देश की खाद्यान्न खरीद व्यवस्था के बदलते स्वरूप की ओर भी संकेत करती है।
दक्षिण और मध्य भारत की बढ़ी भूमिका
पंजाब की खरीद में कमी के समानांतर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में धान खरीद बढ़ी है। इससे स्पष्ट है कि अब सरकारी खरीद का आधार केवल पारंपरिक धान उत्पादक राज्यों तक सीमित नहीं रह गया है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल उत्पादन में वृद्धि और सरकारी खरीद तंत्र के विस्तार के कारण दक्षिण और मध्य भारत के राज्यों की भूमिका बढ़ रही है।
यह बदलाव किसानों के लिए बाजार के विकल्प बढ़ाने की दृष्टि से सकारात्मक हो सकता है, लेकिन पंजाब के लिए यह एक गंभीर आर्थिक चुनौती भी है। राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था लंबे समय से धान-गेहूं के सरकारी खरीद तंत्र पर काफी निर्भर रही है।
भंडारण बना बड़ी चुनौती
कृषि क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, पंजाब इस समय लंबे अंतराल के बाद गंभीर धान खरीद संकट से गुजर रहा है। इस बार मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल रहने के बावजूद खरीद और उठाव की प्रक्रिया में देरी तथा भंडारण की समस्या ने स्थिति को जटिल बनाया है।
पंजाब में धान खरीद की व्यवस्था केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एफसीआई की संयुक्त भूमिका से संचालित होती है। एफसीआई न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदता है। इसके बाद धान की मिलिंग कर चावल तैयार किया जाता है, जिसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए भंडारित अथवा वितरित किया जाता है।
समस्या यह है कि पिछले एक-दो वर्षों में चावल मिल मालिक लगातार भंडारण क्षमता की कमी का मुद्दा उठा रहे हैं। उनका कहना है कि गोदामों में पहले से मौजूद गेहूं और चावल का पर्याप्त उठाव नहीं होने के कारण नई फसल के लिए जगह बनाना मुश्किल हो रहा है।
ऐसे में पंजाब की धान खरीद में गिरावट को केवल आंकड़े के रूप में देखने के बजाय भंडारण क्षमता, समय पर उठाव, खरीद व्यवस्था और फसल विविधीकरण से जोड़कर देखना होगा। यदि खरीद व्यवस्था में समय रहते सुधार नहीं हुआ तो इसका सीधा असर किसानों की आय और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों पर पड़ सकता है। साथ ही, बदलते खरीद भूगोल के बीच पंजाब को अपनी कृषि अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की चुनौती भी स्वीकार करनी होगी।
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