कृषि एवं ग्रामीण वित्त के लिए पैक्स को और अधिक मजबूत बनाना होगा : नाबार्ड चेयरमैन डॉ. चिंतला

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24 जुलाई 2021, भोपाल ।   कृषि एवं ग्रामीण वित्त के लिए पैक्स को और अधिक मजबूत बनाना
होगा : नाबार्ड चेयरमैन डॉ. चिंतला  –
कृषि एवं ग्रामीण साख में 20 वर्ष पूर्व सहकारिता क्षेत्र  विशेष  रूप
से पैक्स की भागीदारी 48 प्रतिशत थी जो अब  घटकर 12 प्रतिशत रह गयी है. एग्री
क्रेडिट में सहकारिता क्षेत्र का हिस्सा बढ़ना जरूरी है | इसके लिए प्राथमिक
सहकारी साख समितिओं को और अधिक मजबूत बनाना होगा | नाबार्ड चेयरमैन डॉ. जी. आर.
चिंतला ने कृषक जगत को यह जानकारी हाल की अपनी मध्य प्रदेश यात्रा में भोपाल
प्रवास पर दी . आपने बताया अभी देश में 1 लाख पैक्स में से लगभग 55 हजार पैक्स
ही कार्यशील हैं , म.प्र. में भी लगभग 50% पैक्स ही पूर्णरूप से कार्य कर रही
हैं |

उन्होंने बताया कि नाबार्ड की कृषि अवसरंचना फण्ड में बड़ी भागीदारी है.
नाबार्ड ने 35 हजार प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को वन-स्टॉप शॉप के रूप में
विकसित करने का लक्ष्य रखा है , नाबार्ड ने 3 हजार पैक्स को बहु सेवा केन्द्रों
की स्थापना के लिए 1 हजार 7 सौ करोड़ रु. मंजूर किये हैं | चेयरमैन डॉ. चिंतला
ने कृषक जगत के साथ चर्चा में स्वीकार किया  कि पैक्स के आधुनिकीकरण की भी बहुत
अधिक आवश्यकता है | उन्होंने ज़ोर दिया कि विशेष रूप से आधुनिक संचार तकनीक से
जोड़ने के लिए पैक्स को कम्प्यूटरीकृत करना आवश्यक है | इसके बाद पैक्स की
कार्यशीलता बढ़ेगी और सहकारी क्षेत्र की एग्री क्रेडिट में हिस्सेदारी बढ़ेगी |
उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी 5-6 वर्षों में ये लक्ष्य प्राप्त कर लिया
जाएगा ।

40 वर्षों से  देश के ग्रामीण विकास में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड ) के अध्यक्ष डॉ. चिंतला ने म.
प्र. प्रवास पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान एवं शासन एवं  वरिष्ठ बैंक
अधिकारीयों से मुलाकात की  | इस अवसर पर श्रीमती टी. एस. राजी गेन मुख्य
महाप्रबंधक एवं अन्य महाप्रबंधकगण श्री वाई. एन. महादेवय्या, श्री एस. के.
तालुकदार , एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे | डॉ. चिंतला ने बताया कि
म.प्र. में सहकारिता की स्थिति को बेहतर बनाने और समग्र ग्रामीण विकास के लिए
नाबार्ड के संसाधनों के उपयोग के लिए नाबार्ड पूर्ण प्रतिबद्ध है | कृषि
उत्पादक संगठनों (एफ.पी.ओ.) के गठन में नाबार्ड की अग्रणी भूमिका को रेखांकित
करते हुए डॉ चिंतला ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में लोगों का वित्तीय समावेशन
एवं साक्षरता के प्रति जागरूक करने के लिए  नाबार्ड लगातार काम कर रहा  है.इसके
साथ ही नाबार्ड के सेल्फ हेल्प ग्रुप्स ने महिलायों के जीवन स्तर को बेहतर
बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। 

 मध्य प्रदेश में नाबार्ड

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नाबार्ड ने विगत वर्षों में भी मध्य पदेश  के ग्रामीण विकास हेतु अब तक 71
लाख से अधिक किसानों को फसल ऋण के लिए 55759 करोड़ की ऋण सीमा संवितरित की है |
इसके अलावा नाबार्ड ने पशुपालन , डेयरी, मत्स्य पालन , खाद्य प्रसंस्करण ,
भण्डारण , कृषि मशीनीकरण हेतु दीर्घकालिक पुनर्वित्त सहायता प्रदान की है |
इसके अलावा ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे सड़कें,पुल,बिजली सयंत्र, सिंचाई आदि के
विकास एवं निर्माण के लिए वित्त पोषण और सहयोग किया है | नाबार्ड राज्य की सभी
39 सहकारी बैंकों का डिजिटलीकरण कर वर्ष 2020-21 में उनकी ऑन बोर्डिंग
प्रक्रिया पूरी कर चुकी है| डॉ. चिंतला ने बताया कि राज्य के आदिवासियों के
जीवन  स्तर को करने के लिए नाबार्ड द्वारा संवर्धित 35 वाटर शेड और 83 वाडी
परियोजनायं शुरू की गई हैं , जिससे लगभग 40745 परिवार और 70776 लाख आदिवासी
कुनबे लाभान्वित हो रहे हैं ।

कृषि एवं ग्रामीण वित्त के लिए पैक्स को और अधिक मजबूत बनाना होगा नाबार्ड चेयरमैन डॉ. चिंतला-1

डॉ जी.आर. चिंतला ने मंत्रालय में  मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान से भेंट कर नाबार्ड द्वारा ग्रामीण विकास, माइक्रो इंरीगेशन,  सौर ऊर्जा परियोजनाओं, जिला सहकारी बैंकों के सुदृढ़ीकरण आदि क्षेत्रों में मध्यप्रदेश सरकार के साथ कार्य की संभावनाओं पर चर्चा की। इसी के साथ मध्यप्रदेश की “एक जिला एक उत्पाद योजना” को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा कृषि उत्पादक संगठनों (एफ.पी.ओ.) को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने नाबार्ड द्वारा प्रकाशित पुस्तक “ मैग्निफिसेंट मार्वेल्स” तथा “नाबार्ड इन मध्यप्रदेश” का विमोचन  किया। 

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