त्रैमासिक राजभाषा कार्यशाला का आयोजन

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18 दिसंबर 2020, इंदौर। त्रैमासिक राजभाषा कार्यशाला का आयोजन त्रैमासिक राजभाषा कार्यशाला का आयोजन – भा.कृ.अनु.प.-भारतीय सोयाबीन अनुसन्धान संस्थान, इंदौर में कल मंगलवार को ज़ूमऐप पर वर्चुअल मोड के माध्यम से त्रैमासिक हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिसमें अतिथि वक्ता डॉ. देवेश कुमार त्यागी ने शासकीय कार्यप्रणाली में राजभाषा के प्रयोग एवं उनकी उपयोगिता से संबंधित अनेक बिंदुओं पर चर्चा की l

अतिथि वक्ता डॉ. देवेश कुमार त्यागी उप निदेशक (राजभाषा), प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, (मध्य प्रदेश /छत्तीसगढ )ने कहा कि सांकेतिक चित्रों के माध्यम को अपनाकर पीढ़ी दर पीढ़ी गुजरते हुए उचित बदलाव के साथ स्थानीय बोली के रूप में धीरे – धीरे हिंदी भाषा का विकास हुआ है, जिसका अन्य क्षेत्रों में भी प्रचलन होता गया l भारत सरकार द्वारा पारित प्रावधानों के कारण वर्तमान में सभी केंद्रीय कार्यालयों में राजभाषा को कामकाज की भाषा के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है l राजभाषा हिंदी देश की जनता को प्रशासन से सीधे जोड़ने के लिए सेतु के रुप में कार्य कर रही है l इसने पूर्व में भी स्वतंत्रता आंदोलन के समय में देश को एक सूत्र मे बांधे रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया हैl हिंदी को राजभाषा बनाने के लिए बंगाल में राजाराम मोहन राय, रविन्द्र नाथ टैगोर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे अनेक विद्वानों एवं समाजसेवियों का योगदान अतुलनीय हैl हिंदी की समकालीन अन्य भाषाओं की चर्चा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य के क्षेत्र में हिंदी के साथ-साथ बंगाली, मराठी व हिंदी की उपयुक्तता हमेशा रही है, जो कि हमारी संस्कृति का अंग है l

डॉ. त्यागी के अनुसार डॉ. पेथे द्वारा लिखित पुस्तक में उल्लेख है कि किस प्रकार से हिन्दी हमारी राजभाषा होनी चाहिए तथा राजभाषा के रूप में प्रयोग से देवनागरी लिपि में लिखे अंकों को सरलता से अपनाया जा सकता है ।इस कार्यशाला की अध्यक्षता संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ. संजय कुमार गुप्ता ने की तथा धन्यवाद प्रस्ताव श्री विकास केशरी ने प्रस्तुत किया।

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