पंजाब सरकार द्वारा खरीफ 2020-21 सीजन में खरीद के लिए ऑनलाइन प्रणाली

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नयी पंजाब कस्टम नीति का ऐलान

28 अगस्त 2020, चंडीगढ़। पंजाब सरकार द्वारा खरीफ 2020-21 सीजन में खरीद के लिए ऑनलाइन प्रणाली कोविड महामारी के दौरान पहली बार समूचे पंजाब में चावल मुहैया करवाए जाने की प्रक्रिया जिसमें चावल मिलों की वीडियो के द्वारा वैरीफिकेशन, अलॉटमैंट और रजिस्ट्रेशन भी शामिल है, खरीफ की फ़सल के 2020-21 सीजन के लिए राज्य की धान से सम्बन्धित नयी कस्टम मिलिंग नीति के अंतर्गत ऑनलाइन ढंग से पूरी की जाएगी।

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धान की निर्विघ्न खरीद को यकीनी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक पोर्टल  www.anaajkharid.in,भी शुरू किया जाएगा, जिसका रास्ता मंगलवार को हुई राज्य की कैबिनेट की मीटिंग में साफ हो गया। मीटिंग के दौरान कैबिनेट द्वारा नयी नीति को मंज़ूरी दी गई, जिसका मकसद धान की निर्विघ्न मिलिंग और राज्य की 4150 से ज़्यादा मिलों से चावलों को केंद्रीय पुल में भेजा जाना है।

यह मीटिंग मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की अध्यक्षता अधीन वर्चुअल प्रणाली द्वारा की गई।

राज्य की सभी खरीद एजेंसियाँ जैसे कि पनग्रेन, मार्कफैड, पनसप, पंजाब स्टेट वेयरहाऊसिंग कोर्पोरेशन जिसमें भारतीय खाद्य निगम और चावल मिल मालिक / उनके कानूनी वारिस और अन्य सम्बन्धित जिनके हित इसके साथ जुड़े हैं, वैबसाईट पर ही अपनी गतिविधियां चलाऐंगे और राज्य का खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग इस संबंधी नोडल विभाग होगा।

इस नीति में  इस सीजन के दौरान मिलों को मुफ़्त धान की फ़सल उपलब्ध करवाए जाने का एकमात्र मापदंड बीते वर्ष भाव खरीफ मार्किटिंग सीजन 2019-20 के दौरान मिल्लर की कारगुज़ारी होगी। मिलों को बीते वर्ष के दौरान आर.ओ. धान समेत कस्टम मिल्ड धान की मिलिंग की तुलना में चावल मुहैया करवाए जाने की तारीख़ को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त प्रतिशत के हिसाब से वित्तीय लाभ दिए जाएंगे। जिन मिलों ने 31 जनवरी, 2020 तक मिलिंग की समूची प्रक्रिया पूरी कर ली थी, वह नीति के अनुसार, 2019-20 में छटाई किए गए मुफ़्त धान के अतिरिक्त 15 प्रतिशत हिस्से के हकदार होंगे। जिन्होंने 28 फरवरी, 2020 तक चावल मुहैया करवाने की प्रक्रिया पूरी की होगी, उनको अतिरिक्त 10 प्रतिशत धान की फ़सल मुफ़्त मिलेगा।

स्टॉकों की ज़मानत के तौर पर इस वर्ष मिल मालिकों को बढ़ी हुई बैंक गारंटी जमा करवानी पड़ेगी, जो कि बीते वर्ष 5000 मीट्रिक टन पर 5 प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष 3000 मीट्रिक टन से अधिक मात्रा के अलॉट होने योग्य मुफ़्त धान की खरीद कीमत के 10 प्रतिशत के बराबर होगी। बैंक गारंटी जमा करवाने के लिए शुरुआती हद कम करने के साथ 1000 से अधिक और मिलें सीधी निगरानी के अंतर्गत आ जाएंगी।

इसके अलावा एक मिल्लर को अपने खाते में 150 मीट्रिक टन कम-से-कम धान की फ़सल खऱीदनी होगी या उसे न वापस करने योग्य 5 लाख रुपए की रकम राज्य के खज़ाने में जमा करवानी पड़ेगी और इसके अलावा 5 लाख रुपए की और रकम वापसी योग्य सिक्योरिटी के तौर पर पनग्रेन के खाते में ऑनलाइन ढंग से जमा करवानी होगी।

धान को किसी और तरफ़ इस्तेमाल किए जाने को रोकने के लिए आर.ओ. धान को कस्टम मिलिंग सिक्योरिटी के दायरे में लाया गया है और मिल मालिकों को भंडारण किये गए पूरे धान या इसके कुछ हिस्से जिसमें आर.ओ. धान की फ़सल भी शामिल होगी, के लिए प्रति मीट्रिक टन के तौर पर 125 रुपए सम्बन्धित एजेंसी के पास जमा करवाने पड़ेंगे।

एक और पृथक कदम उठाते हुए कस्टम मिलिंग राइस में नमी की मात्रा के मुद्दे से निपटने के लिए इस नीति के अंतर्गत नयी मिल के लिए और / या सामथ्र्य बढ़ाने की सूरत में लाजि़मी तौर पर ड्रायर और सोरटैक्स स्थापित किए जाने का प्रावधान है।

नयी नीति के अंतर्गत नयी स्थापित की गई चावल मिलों को एक टन सामथ्र्य के लिए 3500 मीट्रिक टन धान की फ़सल अलॉट की जाएगी और 1.5 टन सामथ्र्य की मिलों को 4000 मीट्रिक टन धान की फ़सल मिलेगी। इसके साथ ही 4500 मीट्रिक टन धान की फ़सल लेने के लिए 2 टन की सामथ्र्य ज़रूरी होगी, जबकि तीन टन सामथ्र्य वाली मिल को 5500 मीट्रिक टन धान की फ़सल मिलेगी। एक मीट्रिक टन के सामथ्र्य की हर वृद्धि का नतीजा 1000 मीट्रिक टन अधिक धान की फ़सल हासिल करने के रूप में निकलेगा।

1 अक्तूबर से शुरू हो रहे खरीफ सीजन के दौरान राज्य द्वारा 170 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जाने की संभावना है, इस वर्ष धान के अधीन कुल क्षेत्रफल 26.60 लाख हेक्टेयर है, जो कि बीते वर्ष 29.20 लाख हेक्टेयर था। भाव राज्य सरकार के फ़सलीय विभिन्नता सम्बन्धी किए गए यत्नों के कारण धान के अधीन क्षेत्रफल घटा है। लक्ष्य यह था कि धान की कस्टम मिलिंग पूरी की जाए और भारतीय खाद्य निगम को 31 मार्च, 2021 तक बनता चावल मुहैया करवा दिया जाए।

मिलिंग के लिए जारी निर्धारित समय सारणी के अंतर्गत मिल मालिकों को 31 दिसंबर, 2020 तक उनके कुल चावल का 35 प्रतिशत हिस्सा मुहैया करना होगा और 31 जनवरी, 2021 तक कुल बकाया चावल का 60 प्रतिशत, 28 फरवरी, 2021 तक कुल बकायाचावल का 80 प्रतिशत और बकाया चावलों की पूरी अदायगी 31 मार्च, 2021 तक करनी होगी।

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