हरी पत्तेदार सब्जियों की वैज्ञानिक खेती

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हरी पत्तेदार सब्जियों की वैज्ञानिक खेती – हरी पत्तेदार सब्जियां हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है भारतवर्ष में उगाई जाने वाली हरी पत्तेदार सब्जियों में पालक, मैथी एवं चौलाई प्रमुख है पोषण में इनकी महत्ता किसी से छिपी नहीं है, बच्चों के उत्तम विकास व विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां अधिक उपयोगी है इनमें प्रोटीन, वसा, विटामिन बी-2 विटामिन सी, विटामिन के एवं खनिज पदार्थ जैसे लोहा, कैल्शियम, फास्फोरस एवं रेसा प्रचुर मात्रा में विद्यमान रहता है। रेशेयुक्त सब्जियां सस्ती व आसानी से उलब्ध होने के साथ-साथ भोजन को शीघ्र पाचनशील, स्वादिष्ट, संतुलित व पौष्टिक बनाने में मदद करती है।

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हमारा प्रतिदिन का भोजन कितना ही मंहगा क्यों न हो भोजन का संतुलित होना अधिक महत्वपूर्ण है। यह आवश्यक नहीं कि गोभी, टमाटर या अन्य कोई सब्जी खूब महंगी है तो हम उसी का ही सेवन करें। हरी पत्तेदार सब्जियों के प्रयोग के साथ-साथ अन्य सब्जियों जैसे जड़वाली, सलादवाली सब्जियों का प्रयोग करना ही स्वास्थ्यवर्धक व लाभप्रद है।

भूमि : इनकी खेती सभी प्रकार की भूमि में आसानी से की जा सकती है किन्तु बलुई दोमट मिट्टी व अच्छी खाद युक्त भूमि एवं काली व चिकनी मिट्टी की अपेक्षाकृत अच्छी रहती है।

उन्नत किस्में:

पालक – आलग्रीन, पूसा ज्योति, पूसा हरित, जोबनेरग्रीन, एच. एस. 23।
मैथी- पूसा अर्ली बंचिग, आरएमटी-1 , पूसा कसूरी।
चौलाई- छोटी चौलाई, बड़ी चौलाई, कोयम्बटूर -1
खाद व उर्वरक – बुवाई से पूर्व 100 क्वि. अच्छी व सड़ी हुई गोबर की खाद, 25 किलो ग्राम नत्रजन, 100 कि. ग्रा. फास्फोरस तथा 40 कि. ग्रा. पोटाश/हे. की दर से भूमि में मिलाकर बुवाई करें। प्रत्येक कटाई के बाद 25 किग्रा नत्रजन/हे. छिटक कर दें। इससे अधिक उपज प्राप्त होती है।

बुआई:

फसल कतार से कतार बीज से बीज की दूरी की दूरी

पालक 20 सेमी 3-4 सेमी
मैथी 20-25 सेमी 3-4 सेमी
चौलाई (छोटी) 20-25 सेमी 4-5 सेमी
चौलाई (बड़ी) 30-35 सेमी 4-5 सेमी

बुआई की विधि : बीज बुवाई के लिए सर्वप्रथम क्यारियों में खाद डालकर अच्छी तरह से मिला दें और भुरभुरी कर लें। यदि नमी न हो तो बुआई के पहले क्यारियों में पलेवा या सिंचाई कर पर्याप्त नमी बना लें। तत्पश्चात बीजों की बुवाई करें। बीज 10-15 सेमी. की दूरी पर बनी लाइनों में बोयें। आवश्यकता से अधिक या अधिक घने हो जाने पर कुछ पौधों को निकाल दें। पत्तियों की कटाई करते समय यह ध्यान रखें कि कटाई जमीन की सतह से 3-5 सेमी. ऊपर से ही करें।

खरपतवार नियंत्रण : क्यारियों से खरपतवार निकालकर क्यारी सदैव साफ -सुथरी रखें ताकि पौधों के बढऩे में कोई असुविधा न हो। यदि आवश्यकता पड़े तो समय-समय पर हल्की निंदाई गुड़ाई भी करते रहें। इनसे पत्तियों की पैदावार गुणवत्ता युक्त और अधिक प्राप्त होती है। तथा कीड़ों का प्रकोप भी कम होता है।

सिंचाई : सब्जियों की किस्म, मिट्टी की दशा व मौसम को ध्यान में रखकर समय-समय पर सिंचाई करते रहें। रोपण किये गये पौधों की अपेक्षा पुराने पौधों को अपेक्षाकृत कम सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। वर्षा ऋतु के अधिक पानी को बाहर निकालने की भी पर्याप्त व्यवस्था हो। बीज की बुवाई सदैव नमीयुक्त स्थिति में करें। सूखे खेत में बीज की बुवाई करने या बीज की बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई करने पर मिट्टी बैठ जाती है। और अंकुरण अच्छा नही होता हैं।

कटाई : बआई के 25-30 दिन बाद प्रथम कटाई करें, बाद में 15-20 दिन के अंतर पर कटाई करते रहें।

उपज:

फसल उपज क्विंटल/हे. कटाई की संख्या
पालक 100-150 4-8
मैथी 80-100 3-5
चौलाई 70-100 6-7

दैनिक भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियों का समावेश अवश्य करें: पालक, चौलाई, मैथी, सहजन की पत्ती, मूली पत्ते, सरसों के कोमल पत्ते, बथुआ आदि का सामान्यत: समस्त देश में उपभोग किया जाता है। इन पत्तेदार सब्जियों के लाभो को ध्यान में रखते हुए अपने दैनिक भोजन में इनको शामिल करें। जिन परंपरागत व्यंजनों में पत्तेदार हरी सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है। इनके निम्नलिखित व्यंजनों में भी पत्तेदार हरी सब्जियों का इस्तेमाल किया जा सकता हैं जैसे –

  • पत्तेदार सब्जियां (मैथी, पालक, चौलाई आदि) मिलाकर दाल तैयार करना।
  • चने का आटा मिलाकर पत्तेदार सब्जियां तैयार करना।
  • पत्तेदार सब्जियां सहित मिश्रित सब्जियां तैयार करना ।
  • गाजर, मूली, शलजम आदि के पत्तों और अन्य पत्तेदार सब्जियोंं से भुजिया तैयार करना।
  • हरी सब्जियां (पालक, बथुआ, आदि) से रायता तैयार करना ।
  • पत्तेदार सब्जियों में नारियल अथवा मूंगफली मिलाकर चटनियां बनाना।
  • खिचड़ी, उपमा आदि जैसे पकवानों में पत्तेदार सब्जियां मिलायें।
  • पत्तेदार सब्जियों में थोड़ा पानी डालकर थोड़ी देर के लिए उबाले और उन्हे मिलाकर पूरियों के लिए आटा गूंथे ।
  • पराठा, चपाती एवं मिस्सी रोटी आदि तैयार करने के लिए अनाज के आटे में पत्तेदार सब्जियां काट कर मिलायें।
  • हरी पत्तेदार सब्जियों को बेहतर ढंग से पकाने की विधि : हरी पत्तेदार सब्जियों को पकाते समय सब्जियों के पौष्टिक तत्व काफी मात्रा में नष्ट हो जाते है अत: ध्यान रखें कि-
  • जिस पानी में पत्तेदार सब्जियां पकायी गई हो उस पानी को न फेंके, इसे दाल, सूप में इस्तेमाल करें यदि बच गया हो तो इससे आटा गूंथे ।
  • जब इनका प्रयोग सलाद के रूप में करना हो तो काटने से पूर्व अच्छे से धो लें।
  • पकाने के लिए कम से कम मात्रा में पानी का प्रयोग करें।
  • पत्तेदार सब्जियों को थोड़ी देर ही पकावें।
  • इन्हे ढंके हुए बर्तन में पकाएं।
  • पत्तेदार सब्जियों को ज्यादा न तलें।

हरी पत्तेदार सब्जियों को सुखाकर पूरे वर्ष इस्तेमाल करे: पत्तेदार सब्जियां जब कम मूल्य पर बहुतायत में उपलब्ध हो तो इन्हे थोक में खरीदा जा सकता है। इन्हे साफ कर 2 प्रतिशत नमक के घोल में डुबोकर धूप में सुखाने के लिए एक साफ चादर पर फैला दें। जब यह पूरी तरह सूख जावे तो इन्हे हाथों से रगड़कर मोटा-मोटा चूरा बना लें। और इन्हे एअर टाइट डिब्बे में रख लें। जब ताजा पत्तेदार सब्जी उपलब्ध न हो तब इनका इस्तेमाल करें।

प्रमुख कीट:

मोयला व पत्ती छेदक कीट- मोयला पत्तियों से रस चूसकर हानि पहुंचाता है जबकि पत्ती छेदक कीट पत्तियों में छेद कर नुकसान पहुंचाता है।
रोकथाम- मेलाथियान 5 प्रतिशत चूर्ण 20 से 25 किग्रा/हे. की दर से भुरकाव करें। भुरकाव से कटाई के बीच कम से 3-4 दिन का अंतराल रखें।

प्रमुख रोग:

आद्र्र गलन – पौधों के उगते ही रोग लग जाता है। जिससे पौधे मरने लगते हैं। और खेत खाली होने लगता है। यह रोग भूमि एवं बीजों के माध्यम से फैलता है।
रोकथाम- बुवाई से पूर्व बीजों को 3 ग्रा. थायरम/किग्रा बीज की दर से बीज उपचार कर बुवाई करें।
पत्ती धब्बा- इस रोग के प्रकोप से पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते हंै जिससे यह सब्जियां बाजार में बेचने योग्य नहीं रह जाती है।
रोकथाम – जिनेब 2 ग्राम या मेन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।
पाउडरी मिल्ड्यू (छाछया) – इस रोग में पत्तियों पर सफेद चूर्णी धब्बे दिखाई देते है।
रोकथाम – घुलनषील गंधक 2 ग्रा. या डायनोकेप 48 ई.सी. एक मिली प्रति ली. पानी में मिलाकर छिड़कें। यह आवश्यकतानुसार 10 दिन के अंतर से दोहराएं।

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