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राज्य कृषि समाचार (State News)

मंत्री को ₹99.60 लाख की सहायता के बाद बदले एनएचबी के नियम

किसानों की सब्सिडी 50% से घटाकर 35% करने का मुद्दा; लंबित आवेदनों पर भी नए प्रावधान लागू

लेखक: सचिन बोन्द्रिया

29 अगस्त 2026, इंदौर: मंत्री को ₹99.60 लाख की सहायता के बाद बदले एनएचबी के नियम – राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की व्यावसायिक बागवानी योजना में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी की पॉलीहाउस परियोजना को ₹99.60 लाख की सब्सिडी स्वीकृत होने, राशि वापस किए जाने और इसके बाद योजना के नियमों में बदलाव किए जाने का घटनाक्रम किसानों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। खासकर हाईटेक और संरक्षित खेती में निवेश करने वाले किसानों तथा कृषि को रोजगार एवं व्यवसाय के रूप में अपनाने वाले युवाओं पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ी है।

किसानों के लिए 50% से 35% सब्सिडी का मुद्दा

नए प्रावधानों के तहत सामान्य क्षेत्रों में वाणिज्यिक बागवानी, संरक्षित खेती, टिश्यू कल्चर, मशरूम, पोस्ट-हार्वेस्ट तथा कोल्ड स्टोरेज घटकों के लिए वित्तीय सहायता की दर 35% कर दी गई है। एनईआर/हिमालयी राज्यों, अनुसूचित क्षेत्रों और निर्धारित विशेष क्षेत्रों के लिए यह दर 45% है।

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किसानों का कहना है कि संरक्षित खेती अथवा हाईटेक खेती में लागत पहले ही लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से सब्सिडी रहित घुलनशील उर्वरकों की कीमतों में भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण 40% से अधिक वृद्धि होने से उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ा है। इसके साथ ही ड्रिप सिंचाई, पाइप, मल्चिंग और संरक्षित खेती में उपयोग होने वाली प्लास्टिक सामग्री की कीमतों में भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

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बढ़ती लागत के बीच घट गई सहायता

हाईटेक खेती में पॉलीहाउस, नेट हाउस, ड्रिप, फर्टिगेशन, मल्चिंग, प्लास्टिक सामग्री, पौध सामग्री, उर्वरक और अन्य तकनीकी संसाधनों पर किसान को बड़ी पूंजी लगानी पड़ती है। ऐसे समय में सब्सिडी की दर कम होने से परियोजना की अपनी लागत और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं।

किसानों का तर्क है कि जब खेती में इनपुट लागत लगातार बढ़ रही है, तब सहायता की दर कम होने से सरकारी सब्सिडी का वास्तविक लाभ काफी सीमित हो जाएगा। विशेष रूप से छोटे और मध्यम निवेश वाले किसानों के लिए बैंक ऋण, ब्याज, निर्माण लागत और परिचालन खर्च को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

पढ़े-लिखे युवाओं का हाईटेक खेती से मोहभंग?

हाईटेक कृषि को ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता का नया क्षेत्र माना जा रहा है। कृषि, उद्यानिकी और अन्य उच्च शिक्षा प्राप्त युवा आधुनिक तकनीक आधारित खेती में अपना करियर बनाने के लिए आगे आ रहे हैं। लेकिन किसानों का कहना है कि यदि परियोजना की शुरुआती लागत बढ़ती रहे और दूसरी ओर सरकारी सहायता घटती जाए तो युवाओं के लिए हाईटेक खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाना मुश्किल होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार संरक्षित खेती में केवल ढांचा खड़ा करना ही पर्याप्त नहीं है। उत्पादन के दौरान उर्वरक, कीटनाशक, पानी, ऊर्जा, पौध सामग्री, प्लास्टिक और श्रम की लागत भी लगातार आती है। इसलिए सब्सिडी में कमी का प्रभाव केवल परियोजना स्थापित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसकी आर्थिक व्यवहार्यता पर भी पड़ सकता है।

परिवार से केवल एक सदस्य को लाभ

एनएचबी ने सहायता के दोहराव को रोकने के लिए परिवार की पात्रता के नियम भी कड़े किए हैं। परिवार में पति/पत्नी, माता-पिता और पुत्र-पुत्रियों को शामिल किया गया है। अब एक परिवार से केवल एक सदस्य एनएचबी की योजना में वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकेगा।

यदि परिवार के किसी सदस्य को पहले ही सहायता मिल चुकी है तो उसी परिवार के दूसरे सदस्य को अन्य एनएचबी योजना या घटक में सहायता नहीं मिलेगी। गलत जानकारी अथवा गलत घोषणा के आधार पर लाभ लेने पर राशि ब्याज सहित वसूलने का प्रावधान भी किया गया है।

लंबित आवेदनों पर भी नए नियम

संशोधित प्रावधानों का असर लंबित LoC/GoC आवेदन और सब्सिडी दावों पर भी पड़ेगा। इनका निपटारा नए प्रावधानों के अनुसार मामले-दर-मामले किया जाएगा।

मंत्री की परियोजना को ₹99.60 लाख की सहायता स्वीकृति और राशि वापसी के बाद नियमों में बदलाव ने स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े किए हैं। हालांकि एनएचबी के आदेश में इन संशोधनों को मंत्री की परियोजना से सीधे जोड़ने का उल्लेख नहीं है। किसानों की प्रमुख मांग अब यह है कि बढ़ती कृषि लागत और हाईटेक खेती में बढ़ते निवेश को देखते हुए सब्सिडी घटाने के बजाय वास्तविक लागत के अनुरूप सहायता व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि कृषि को करियर बनाने वाले युवा और आधुनिक तकनीक अपनाने वाले किसान हतोत्साहित न हों।

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