दतिया में उर्वरक प्रबंधन की नई पहल
10 नवंबर 2025, दतिया: दतिया में उर्वरक प्रबंधन की नई पहल – कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखड़े के निर्देशन में जिले में किसानों को डीएपी (डाय अमोनियम फॉस्फेट) के प्रभावी विकल्प अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा वैज्ञानिक सलाह देकर किसानों को उर्वरक प्रबंधन के आधुनिक तरीकों से जोड़ने की पहल शुरू की गई है।
उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री राजीव वशिष्ठ ने बताया कि जिले में डीएपी के पर्याप्त विकल्प उपलब्ध हैं। डीएपी में केवल दो पोषक तत्व – 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फास्फोरस पाए जाते हैं, जबकि इसके विकल्पों में अतिरिक्त पोषक तत्व भी होते हैं, जो फसलों के समग्र विकास के लिए आवश्यक हैं। मुख्य विकल्प इस प्रकार हैं पहला विकल्प एक बोरी डीएपी के स्थान पर 20 किलोग्राम यूरिया और तीन बोरी सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी)। एसएसपी में 16 प्रतिशत फास्फोरस, 12.5 प्रतिशत सल्फर और 21 प्रतिशत कैल्शियम होता है। दूसरा विकल्प डीएपी की जगह एनपीके (12ः32ः16) का उपयोग, जिसमें 12 प्रतिशत नाइट्रोजन , 32 प्रतिशत फास्फोरस और 16 प्रतिशत पोटाश पाया जाता है। तीसरा विकल्प कॉम्प्लेक्स (20ः20ः0ः13) का उपयोग, जिसमें 20 प्रतिशत नाइट्रोजन, 20 प्रतिशत फास्फोरस और 13 प्रतिशत सल्फर पाया जाता है। सल्फर की उपस्थिति से दलहनी फसलों में प्रोटीन और तिलहनी फसलों में तेल की मात्रा बढ़ती है। अन्य विकल्प एनपीके 14ः28ः14, 14ः35ः14, 10ः26ः26, 15ः15ः15, एवं 16ः16ः16 भी अत्यंत प्रभावी हैं।
कलेक्टर श्री वानखड़े ने किसानों से अपील की है कि वे कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर इन वैकल्पिक उर्वरकों का प्रयोग करें। इससे खेती की लागत घटेगी, मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी, और फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह पहल मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव के मार्गदर्शन में “वैज्ञानिक खेती – समृद्ध किसान” के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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