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राज्य कृषि समाचार (State News)

नीमच : किसान फसल में नमी संरक्षण पर दें विशेष ध्यान

10 सितंबर 2026, नीमच: नीमच : किसान फसल में नमी संरक्षण पर दें विशेष ध्यान – जिले में वर्तमान मानसून अवधि के दौरान अब तक सामान्य से लगभग 20 से 25 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण फसलों में नमी की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। कृषि विज्ञान केंद्र नीमच ने किसानों को सलाह दी है कि वे घबराने के बजाय खेत एवं फसल की स्थिति का नियमित निरीक्षण करें तथा उपलब्ध नमी का संरक्षण करें।

सोयाबीन, मक्का, मूंगफली सहित अन्य फसलों में इस समय नमी की कमी होने पर उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सिंचाई सुविधा वाले किसान उपलब्ध पानी का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर आवश्यकता वाली फसलों में करें। वहीं जिन खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध है, वहां अनावश्यक सिंचाई नहीं करने की सलाह दी गई है।

कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी करें – कम वर्षा की स्थिति में फसलों में कीटों का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में किसान नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें। किसी कीट या रोग का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से अधिक पाए जाने पर ही कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार अनुशंसित कृषि रसायनों का उपयोग करें।

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सोयाबीन में सेमीलूपर एवं गर्डल बीटल का प्रकोप दिखाई देने पर नियंत्रण के लिए निम्न में से अनुशंसित विकल्पों का उपयोग किया जा सकता  है –  क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एस.सी. 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर। पूर्व मिश्रित बीटा सायफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड — 350 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर। थायोमिथॉक्सम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन — 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर।

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सोयाबीन एवं उड़द में पीला मोजेक रोग दिखाई देने पर रस चूसक कीट एवं सफेद मक्खी (व्हाइटफ्लाई) के नियंत्रण के लिए – डाईमिथोएट 30 प्रतिशत ईसी — 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल — 200 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

मक्का में फॉल आर्मीवर्म/इल्ली का प्रकोप दिखाई देने पर इमामेक्टिन बेंजोएट — 220 ग्राम प्रति हेक्टेयर, अथवा क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन — 200 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

मूंगफली में सफेद लट के नियंत्रण के लिए क्लोथियानीडीन 50 प्रतिशत डब्ल्यूडीजी की 250 ग्राम मात्रा प्रति 1000 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रेंचिंग करने की सलाह दी गई है।  मूंगफली में व्याधि नियंत्रण के लिए पूर्व मिश्रित टेबुकोनाजोल + सल्फर की 1 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जा सकता है।

कृषि विज्ञान केंद्र नीमच के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. सी.पी. पचौरी ने किसानों से अपील की है कि फसल में किसी भी कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर पहले उसकी सही पहचान कराएं और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही अनुशंसित कृषि रसायन का प्रयोग करें।

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