नरसिंहपुर : खेत-तालाब ने लौटाई खेतों की हरियाली
14 अगस्त 2026, नरसिंहपुर: नरसिंहपुर : खेत-तालाब ने लौटाई खेतों की हरियाली – कभी भू-जल स्तर लगातार नीचे जाने से सिंचाई को लेकर चिंतित किसान आज अपने खेतों में संचित पानी देखकर राहत महसूस कर रहे हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत खेत-तालाब योजना के माध्यम से तैयार की गई जल संरचनाओं ने किसानों के लिए न केवल सिंचाई का स्थायी सहारा तैयार किया है, बल्कि भू-जल स्तर को बढ़ाने में भी मदद की है। जिले के ग्राम पंचायत कपूरी के किसान श्री छोटेलाल जाट और ग्राम पंचायत करताज के किसान श्री मिथलेश दुबे इसके जीवंत उदाहरण हैं।
खेत-तालाब ने बदली छोटेलाल जाट के खेत की तस्वीर – साढ़े चार एकड़ भूमि के किसान श्री छोटेलाल जाट के खेत में पहले भू-जल स्तर काफी नीचे चला गया था। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर वे चिंतित रहते थे। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत खेत-तालाब योजना से उनके खेत में जल संरक्षण की संरचना तैयार की गई। लगभग 40 मीटर आकार और 3 मीटर गहराई वाले इस खेत-तालाब में करीब 3,600 घन मीटर पानी का भंडारण हो रहा है। बारिश के पानी को खेत में रोककर उसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा है। वर्तमान में तालाब के पानी से 7 से 8 स्प्रिंकलर के माध्यम से फसलों की सिंचाई की जा रही है।
खेत-तालाब बनने के बाद छोटेलाल जाट के खेत में सिंचाई की सुविधा मजबूत हुई है और आसपास के भू-जल स्तर में भी सुधार दिखाई दे रहा है। करीब 3 लाख 96 हजार रुपये की लागत से निर्मित यह खेत-तालाब उनके लिए खेती में पानी की चिंता दूर करने के साथ जल संरक्षण का मजबूत माध्यम बन गया है।
कृषक श्री मिथलेश दुबे को भी मिली सिंचाई की चिंता से मुक्ति – इसी तरह श्री मिथलेश दुबे की लगभग 4 एकड़ भूमि में भी भू-जल स्तर नीचे चले जाने से सिंचाई को लेकर चिंता बनी हुई थी। खेती के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता उनके लिए बड़ी चुनौती थी। जल गंगा संवर्धन अभियान के दौरान उनके खेत में भी खेत-तालाब का निर्माण किया गया। बारिश के बाद अब उनका खेत-तालाब पानी से भरा हुआ है। वर्षा जल के संग्रहण से उन्हें फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो रहा है। खेत में पानी देखकर उनकी सिंचाई संबंधी चिंता काफी हद तक दूर हुई है। साथ ही खेत-तालाब में पानी के संग्रहण और भू-जल पुनर्भरण से भू-जल स्तर में भी सुधार होने लगा है।
जल संरक्षण से खेती को मिला नया भरोसा – कृषक श्री छोटेलाल जाट और श्री मिथलेश दुबे की कहानी बताती है कि खेत में वर्षा जल को रोकने और उसका उपयोग करने की छोटी-सी पहल किसानों के लिए कितनी बड़ी राहत बन सकती है। खेत-तालाब योजना के माध्यम से एक ओर जहां बारिश के पानी को व्यर्थ बहने से रोका जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भू-जल पुनर्भरण के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किए गए ऐसे कार्य किसानों को जल संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों के चेहरे पर संतोष है और उन्हें अपनी खेती के भविष्य को लेकर नया भरोसा मिला है।
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