आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी अरहर की पैदावार, सीड-कम-फर्टी ड्रिल से वैज्ञानिक बुआई पर जोर
16 जुलाई 2026, रायपुर: आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी अरहर की पैदावार, सीड-कम-फर्टी ड्रिल से वैज्ञानिक बुआई पर जोर – खरीफ मौसम में दलहन फसलों का रकबा और उत्पादन बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ में कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिकों ने विशेष अभियान शुरू किया है। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी), रायपुर के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से सीड-कम-फर्टी ड्रिल मशीन से अरहर की वैज्ञानिक बुआई कराई जा रही है।
इस पहल के अंतर्गत सरगुजा जिले के विभिन्न गांवों में समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (Cluster Front Line Demonstration) कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और वैज्ञानिक बुआई की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सीड-कम-फर्टी ड्रिल मशीन से बीज और उर्वरक एक साथ निर्धारित गहराई एवं उचित दूरी पर डाले जाते हैं। इससे बीजों का समान अंकुरण होता है, उर्वरकों का बेहतर उपयोग होता है और श्रम व समय दोनों की बचत होती है। परिणामस्वरूप फसल की वृद्धि बेहतर होती है तथा उत्पादन में वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक विधि से की गई अरहर की बुआई न केवल उत्पादन बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि किसानों की लागत भी कम करेगी और उन्हें अधिक लाभ प्राप्त होगा। आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से खेती अधिक दक्ष, टिकाऊ और लाभकारी बन रही है।
राज्य सरकार और कृषि वैज्ञानिकों का उद्देश्य किसानों को नवीन तकनीकों से जोड़कर दलहन उत्पादन बढ़ाना, प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है। सरगुजा में चल रहे ये अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
क्या है सीड-कम-फर्टी ड्रिल तकनीक और इसके 5 बड़े फायदे?
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बदलते मौसम और सिंचाई जल की सीमित उपलब्धता को देखते हुए अरहर किसानों के लिए एक कम पानी में अधिक लाभ देने वाली फसल बनकर उभर रही है। वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से बेहतर उत्पादन के साथ खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सकती है। जब इसकी बुआई साधारण तरीके के बजाय सीड-कम-फर्टी ड्रिल मशीन से कतार पद्धति में की जाती है, तो इसके निम्नलिखित फायदे होते हैं:
बीज और खाद की बड़ी बचत: इस मशीन की मदद से बीज और उर्वरक (Fertilizer) दोनों एक साथ और बिल्कुल संतुलित मात्रा में गिरते हैं, जिससे बर्बादी नहीं होती।
कम श्रम लागत: पारंपरिक बोवाई की तुलना में इसमें समय बहुत कम लगता है और मजदूरों का खर्च (Labour Cost) घट जाता है।
समान दूरी और बेहतर अंकुरण: पौधों के बीच एक निश्चित और समान दूरी बनी रहती है, जिससे हर पौधे को पर्याप्त धूप, हवा और पोषण मिलता है। इससे फसल का स्वास्थ्य शानदार रहता है।
कम पानी में बंपर पैदावार: कतार पद्धति से बुआई करने पर कम सिंचाई में भी पौधे बेहतर फलियां मिलती हैं।
प्रभावी खरपतवार प्रबंधन: कतारों में बुआई होने से खरपतवार (Weeds) साफ करना आसान हो जाता है। इसके लिए किसानों को अनुशंसित शाकनाशी भी उपलब्ध कराई जा रही है।
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