दूध उत्पादन किसान की आय दोगुनी करने अच्छा साधन

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75 वें विश्व दुग्ध दिवस अमृत महोत्सव पर राज्य स्तरीय वेबिनार

2 जून 2021, रायपुर । दूध उत्पादन किसान की आय दोगुनी करने अच्छा साधन – इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के तहत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, दन्तेवाड़ा द्वारा विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय वेबीनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ. एस.के. पाटील ने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज विश्व में सबसे ज्यादा दूध का उत्पादन व खपत भारत देश में होता है जो कि दिखाता है कि हममें कितनी क्षमता है। दूध का उत्पादन एवं खपत के साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि प्रति व्यक्ति को दूध की उपलब्धता है कि नही। हमारे यहाँ पशुधन अधिक है साथ ही दूध का उत्पादन भी बहुत है पर मूल्य कम है।

 वहीं उत्पादन अधिक होने व खपत कम होने की स्थित में समस्या हो सकती है जो कि किसानों एवं छात्रों के लिए एक अच्छा अवसर है इससे वे इंटरप्राईसेस के रूप में काम कर सकते है। दूध उत्पादन किसान की आय दोगुनी करने अच्छा साधन है ।

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, दन्तेवाड़ा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डाॅ. नारायण साहू ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य डेयरी या दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में स्थिरता, आजीविका और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना तथा दूध को वैश्विक भोजन के रूप में मान्यता देना है। विशिष्ट अतिथि दाऊ श्री वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलपति डाॅ. एन.पी. दक्षिणकर ने कहा कि दूध पोषक तत्वों की पूर्ति हेतु बडा महत्व रखता है। वर्तमान में कृषि विज्ञान केन्द्रों में कई कार्यक्रम हुए हैं जिसमें एफ.पी.ओ. के माध्यम से दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है साथ ही वर्ष 2024 तक 10000 एफ.पी.ओ. निमार्ण का लक्ष्य रखा गया है। आज के परिपेक्ष में आधे से ज्यादा आबादी कृषि पर निर्भर है जिसमें 86 प्रतिशत लोगों के पास डेढ़ से दो हेक्टेयर से भी कम जमीन उपलब्ध है। वहीं 75 प्रतिशत लोगों की आय 15000 रूपये से भी कम है जो कि एक बडी समस्या है। उन्होने कहा कि यदि हम जैव-विविधता के साथ कार्य करते है तो 75 प्रतिशत में से 7 प्रतिशत किसानों की आमदनी 30000 रूपये तक की हो सकती है। जिसमे पशुधन बहुत बडी भूमिका अदा कर सकती है। कृषि तकनीकी अनुप्रयोग एवं अनुसंधान संस्थान, , जबलपुर के निदेशक डाॅ. एस.आर.के. सिंह ने कहा कि कोराना काल में भोजन के पौष्टिक विकलप के रूप में दूध की उपयोगिता को बढा दिया है।

निदेशक विस्तार सेवाए डाॅ.एस.सी. मुखर्जी ने कहा कि विश्व दुग्ध दिवस का प्ररंभ सन 2001 में किया गया था जिसका उद्देश्य दूध के उत्पादन उनके पोषक तत्व मान व रोजगार के अवसर को बढावा देना था। वर्ष 2021 में हमारे देश में 200 मिलीयन टन दूध उत्पादन हो रहा है और विश्व में प्रथम स्थान रखता है।

इस एक दिवसीय वेबिनार कार्यक्रम में तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया जिसमें शहीद गुड़ाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, जगदलपुर के अधिष्ठाता डाॅ. एच.सी. नन्दा ने कृषकों की आय दोगुनी करने में दुग्ध उत्पादन की भूमिका विषय पर विस्तृत पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से किसानों एव छात्रों को जानकारी दी। पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, अंजोरा दुर्ग के अधिष्ठाता डाॅ. एस.के. तिवारी दुधारू पशुओं का चिकित्सकीय देखभाल पर जानकरी दी गई , इसी क्रम में संयुक्त संचालक पशुपालन विभाग, बस्तर संभाग डाॅ. लक्ष्मी अजगले ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दुग्ध उत्पादकों हेतु संचालित कल्याणकारी योजनाओं के बारे में प्रतिभागियों को विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी

दंतेवाडा जिले के पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विभाग के उपसंचालक डाॅ. अजमेर सिंह कुशवाहा, ने दुग्ध उद्यमिता से किसानों की आर्थिक सुदृणीकरण विषय पर व्याख्यान दिया। कृषि विज्ञान केन्द्र, कोरिया के विषय वस्तु विशेषज्ञ डाॅ. सम्भूति शंकर साहू ने दुग्ध प्रसंस्करण के बारे में जानकारी दी। प्रक्षेत्र प्रबंधक डाॅ. भुजेन्द्र कोठारी, ने वर्ष भर हरा चारा उत्पादन की तकनीकी पर प्रकाश डाला।

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