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राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश के गेहूं उपार्जन में मार्कफेड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

गत वर्ष की तुलना में 225 प्रतिशत अधिक उपार्जन

07 सितंबर 2020, भोपाल। मध्यप्रदेश के गेहूं उपार्जन में मार्कफेड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई – म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता के उर्वरक उचित दामों पर उपलब्ध कराती है। इसके साथ-साथ ही म.प्र. की गेहूँ एवं धान उपार्जन की सहायक एजेंसी के रूप में भी कार्य कर रही है।

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श्री पी. नरहरि, प्रबंध संचालक मार्कफेड ने कृषक जगत को बताया कि विपणन संघ द्वारा वर्ष 2008-09 से केन्द्र सरकार की विकेन्द्रीयकृत उपार्जन प्रणाली के अंतर्गत राज्य शासन के निर्देशानुसार आवंटित जिलों में गेहूं का उपार्जन का कार्य किया जाता रहा है। इसी के तहत वर्ष 2020 में भी विपणन संघ द्वारा मार्च 2020 से राज्य के 05 संभागों के 30 जिलों मेंं 1741 उपार्जन केन्द्रों पर कुल पंजीकृत 10.25 लाख किसानों का लगभग 39.17 लाख मे. टन गेहूं खरीदने हेेतु प्रारंभिक तैयारी की गई। लेकिन विश्वव्यापी महामारी कोरोना संकट के चलते केन्द्र सरकार द्वारा लॉकडाउन घोषित कर दिया गया, जिससे प्रदेश के किसानों में उनकी गेहूं की फसल को खुले बाजार में बेचने का भारी संकट उत्पन्न हो गया।

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राज्य सरकार ने विपरीत परिस्थितियों में भी तत्परता से निर्णय लेते हुए 15 अप्रैल 2020 से समस्त प्रदेश में गेहूं खरीदने के आदेश प्रसारित किए। लेकिन 05 संभागों के 30 जिलों में खरीदी प्रारंभ करने हेतु मार्कफेड के समक्ष चुनौतियों के पहाड़ खड़े थे, जिसमें सबसे पहले जिलों में लॉकडाउन एवं महामारी के चलते अधिकारियों/ कर्मचारियों को कार्यालय में उपस्थित होकर कार्य करने हेतु मानसिक रूप से तैयार करना, अन्य किसी जिलों में फंसे हुए अधिकारियों को उनके कार्यस्थल पर पहुंचाने की व्यवस्था करना एवं लॉकडाउन के कारण पूर्ण रूप से बाजारों के बंद होने, परिवहन व्यवस्था अव्यवस्थित होने, मजदूरों का पलायन इत्यादि समस्याओं के बीच जिलों में खरीदी प्रारंभ कराने हेतु खरीदी केन्द्रों पर बारदानों एवं हम्मालों की व्यवस्था करना, खरीदी केन्द्रों से गेहूं के परिवहन हेतु ट्रकों की व्यवस्था कराना, भण्डारण केन्द्रों पर स्कंध के अनलोडिंग कार्य हेतु हम्मालों को पहुंचाना अत्यंत दुष्कर कार्य थे।

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इन चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में भी मार्कफेड के कुशल नेतृत्व के दम पर किसानों की उपज का उपार्जन किया गया। पूर्व निर्धारित 1496 उपार्जन केन्द्रों में वृद्धि करते हुए कुल 2138 उपार्जन केन्द्र तैयार किये गये लक्ष्य 39.17 लाख मे. टन के विरूद्ध 7.80 लाख किसानों से 57.96 लाख मे. टन गेहूं का उपार्जन एवं सुरक्षित भण्डारण कर प्रदेश को देश में सर्वाधिक उपार्जन वाले राज्यों में प्रथम स्थान पर खड़ा करने में मार्कफेड अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

साथ ही साथ किसानों का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में कराने हेतु भी पूर्ण तत्परता से खाद्यान्न साख सीमा से ऋण लेकर व्यवस्था की। इसके लिये किसानों को राशि रू. 11114.95 करोड़ भुगतान किया जा चुका है।

225 प्रतिशत अधिक उपार्जन : बनाया रिकॉर्ड

रबी सीजन 2019-20 में विपणन संघ द्वारा आवंटित कुल 30 जिलों में 4.01 लाख किसानों से 25.75 लाख मे. टन के गेहूं का उपार्जन किया गया वहीं वर्तमान की विकट परिस्थितियों के बीच रबी सीजन 2020-21 में 7.80 लाख किसानों से 57.96 लाख मे. टन गेहूं का उपार्जन कर पूर्व वर्ष की तुलना में 225 प्रतिशत उपार्जन किया गया जो कि राज्य ही नहंीं वरन सम्पूर्ण देश में उपार्जन का एक नया रिकॉर्ड है।