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राज्य कृषि समाचार (State News)

मंदसौर: कृषक आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ सोयाबीन की खेती करें

30 जून 2026, मंदसौर: मंदसौर: कृषक आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ सोयाबीन की खेती करें – मंदसौर जिले में इस वर्ष खरीफ 2026 में लगभग 320000 हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी प्रस्तावित है। जिसमें से लगभग 270000 हैक्टेयर में सोयाबीन फसल की बुआई की जाएगी।

उप संचालक कृषि श्री रविन्द्र मोदी ने बताया कि वर्तमान में अलनीनो के कारण वर्षा की अनिश्चितता को देखते हुए किसान भाइयों से अपील है कि सोयाबीन की बुवाई, रेज्ड बेड या ब्रॉड बेड फरो (बीबीएफ) एवं रिज एवं फरो वैज्ञानिक बुवाई पद्धतियाँ अपनाने की सलाह दी जा रही है। इन पद्धतियों से अधिक वर्षा होने पर खेत से अतिरिक्त पानी का उचित निकास हो जाता है तथा कम वर्षा की स्थिति में नमी सुरक्षित रहती है। इससे जलभराव एवं सूखे, दोनों परिस्थितियों में फसल को सुरक्षा मिलती है तथा पौधों का विकास बेहतर होता है।

किसानों को अधिक उत्पादन एवं बेहतर लाभ प्राप्त करने के लिए नवीन एवं उन्नत सोयाबीन किस्मों जैसे एनआरसी-131, एनआरसी-150, एनआरसी-157, एनआरसी-136, एनआरसी-138, एनआरसी-142 जेएस-2172, जेएस-20-98 जेएस 20-116, जेएस 20-94 जेएस 23-03, जेएस 23-05, आरवीएस-2001-4, आर.व्ही.एस.एम. 11-35 आदि क्षेत्र के लिए अनुशंसित अन्य उन्नत किस्मों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

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किसानों को प्रमाणित एवं उपचारित बीज का उपयोग करने, अनुशंसित बीज दर एवं उर्वरक प्रबंधन अपनाने, समय पर खरपतवार नियंत्रण तथा कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी करने की भी सलाह दी गई है। वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर सोयाबीन की उत्पादकता में वृद्धि के साथ उत्पादन लागत में कमी एवं किसानों की आय में बढ़ोतरी संभव है।

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कृषि विभाग द्वारा सभी कृषक भाइयों से अपील की गई है कि वे जिले के कृषि विज्ञान केन्द्र, उद्यानिकी महाविद्यालय एवं निकटतम कृषि कार्यालय अथवा कृषि विस्तार अधिकारियों से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ सोयाबीन की खेती करें, जिससे अधिक उत्पादन एवं बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सके।किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वर्षा अधिक विलंब से आने की स्थिति में कम अवधि वाली फैसले जैसे उड़द, मूंग एवं तिल इत्यादि का चयन करें। यह फसलें कम पानी में भी अधिक उत्पादन एवं मुनाफा देने वाली फसलें हैं।

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