राज्य कृषि समाचार (State News)सरकारी योजनाएं (Government Schemes)

राजस्थान में फसल बीमा में बड़ी राहत, किसानों के प्रीमियम का बोझ घटेगा

14 अगस्त 2026, जयपुर: राजस्थान में फसल बीमा में बड़ी राहत, किसानों के प्रीमियम का बोझ घटेगा – राजस्थान सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को होने वाले नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के वर्ष 2026 के लिए नई निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था में किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए बीमा कंपनियों की जवाबदेही तय करने, तकनीक के अधिक इस्तेमाल और फसल नुकसान के दावों का समय पर निस्तारण सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

नई निविदा व्यवस्था के तहत राजस्थान के सभी 41 जिलों को आठ क्लस्टरों में विभाजित किया गया है। साथ ही, किसी एक बीमा कंपनी को अधिकतम दो क्लस्टर ही आवंटित किए जाने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे बीमा कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कंपनियां किसानों को बेहतर एवं समयबद्ध सेवाएं देने के लिए अधिक जवाबदेह होंगी।

प्रीमियम दर में भारी कमी

नई निविदा प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ प्रीमियम दर में आई कमी को माना जा रहा है। सरकार के अनुसार पिछली निविदा में औसत सकल प्रीमियम दर 9.63 प्रतिशत थी, जो नई निविदा में घटकर मात्र 1.19 प्रतिशत रह गई है। प्रीमियम दर में यह कमी किसानों और सरकार दोनों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

किसानों द्वारा देय कुल प्रीमियम राशि भी 979.15 करोड़ रुपये से घटकर लगभग 645 करोड़ रुपये रह गई है। इस तरह किसानों को करीब 335 करोड़ रुपये की वित्तीय बचत होने का अनुमान है। ऐसे समय में जब प्राकृतिक आपदाओं, अनियमित बारिश और मौसम में बदलाव के कारण खेती का जोखिम बढ़ रहा है, प्रीमियम का बोझ कम होना किसानों के लिए बड़ी राहत है।

सरकार के प्रीमियम अनुदान में भी कमी

नई निविदा के बाद राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले प्रीमियम अनुदान में भी उल्लेखनीय कमी आई है। सरकार के अनुसार राज्यांश प्रीमियम अनुदान पहले 1,878.27 करोड़ रुपये था, जो अब घटकर करीब 51 करोड़ रुपये रह गया है। इससे सरकारी खजाने पर भी वित्तीय भार कम होगा।

हालांकि, इस पूरी व्यवस्था की असली सफलता केवल कम प्रीमियम दर में नहीं, बल्कि किसानों को समय पर मुआवजा मिलने में होगी। फसल खराब होने के बाद यदि सर्वे, आकलन और दावा निस्तारण में लंबा समय लग जाए तो बीमा का उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है। इसलिए नई व्यवस्था में तकनीक के प्रभावी उपयोग, पारदर्शी आकलन और समयबद्ध भुगतान को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

कृषि पहले ही मौसम की अनिश्चितता, लागत बढ़ने और बाजार जोखिम जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में फसल बीमा किसानों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा कवच है। राजस्थान की नई निविदा व्यवस्था यदि दावों के त्वरित निस्तारण और पारदर्शी सेवा में भी अपेक्षित परिणाम देती है, तो यह किसानों के भरोसे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture