राज्य कृषि समाचार (State News)किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)

धान की जगह मक्का-सरसों: किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा बदलाव

17 जनवरी 2025, रायपुर: धान की जगह मक्का-सरसों: किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा बदलाव – छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के ग्राम जंगलेशर में खेतों में पीली सरसों के फूलों की चादर और मक्के की लहराती फसलें अब केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि कृषि में आए बदलाव की तस्वीर भी पेश कर रही हैं। यहां के किसान परंपरागत धान की खेती से अलग हटकर अब मक्का, सरसों और गेहूं जैसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि जल संकट की समस्या से भी राहत मिल रही है।

परंपरा से हटकर नई संभावनाओं की तलाश

गांव के प्रगतिशील किसान अशोक रामचंद्र गुप्ता, अमित गुप्ता और प्रसन्न कुमार जैन ने फसल चक्र में बदलाव की शुरुआत की है। इन्होंने अपने 50 एकड़ खेत में मक्का, 15 एकड़ में सरसों और 30 एकड़ में गेहूं की खेती को प्राथमिकता दी है। इन किसानों का कहना है कि परंपरागत धान की खेती में पानी की अधिक खपत और बढ़ती लागत के चलते उन्होंने यह बदलाव किया है।

किसानों के अनुसार, सरसों की खेती में प्रति एकड़ लगभग 5 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि 6-7 क्विंटल उत्पादन होने पर करीब 40-42 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है। इसी तरह, मक्का से प्रति एकड़ 60 हजार रुपये और गेहूं से 30 हजार रुपये की आय हो रही है।

बदलाव की ओर किसान

फसल परिवर्तन के इस निर्णय में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और बेहतर बीज उपलब्ध कराने की सरकारी योजनाओं का सहयोग मिला है। मक्का और सरसों के उच्च गुणवत्ता वाले बीज निःशुल्क उपलब्ध कराए गए हैं, साथ ही फसल देखभाल और कीट प्रबंधन को लेकर ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

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धान की तुलना में इन फसलों की सिंचाई जरूरत कम होने से जल संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है। इसके अलावा, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए किसान अब दलहन-तिलहन और उद्यानिकी फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं।

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गांव के किसान अशोक रामचंद्र गुप्ता कहते हैं, “धान के बदले मक्का और सरसों की खेती से अच्छा मुनाफा हो रहा है और पानी की भी बचत हो रही है।” वहीं, अमित गुप्ता का कहना है कि “खेती के नए तरीकों को अपनाने से उत्पादन में सुधार हुआ है और मेहनत भी कम लगती है।”

राजनांदगांव में जिला प्रशासन और कृषि विभाग भी फसल चक्र परिवर्तन को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चला रहे हैं। किसानों को जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और जैविक खेती के फायदों के बारे में जानकारी दी जा रही है।

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