राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश: सब्जी की खेती ने बदली महिलाओं की किस्मत, अब हर महीने हो रही ₹40 हजार तक की कमाई

28 जुलाई 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: सब्जी की खेती ने बदली महिलाओं की किस्मत, अब हर महीने हो रही ₹40 हजार तक की कमाई – मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ विकासखंड का छोटा-सा ग्राम मानपुरा देव आज महिला सशक्तिकरण और आधुनिक खेती की मिसाल बनकर उभरा है। यहां स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं पारंपरिक खेती छोड़ आधुनिक तकनीकों से सब्जी उत्पादन कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। आधुनिक खेती और बेहतर विपणन व्यवस्था की बदौलत प्रत्येक महिला औसतन ₹30 हजार से ₹40 हजार प्रतिमाह तक की आय अर्जित कर रही है।

गांव में वर्तमान में 17 स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे करीब 170 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन महिलाओं ने खेती को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बना लिया है। समूह की सदस्य अपने खेतों में पॉली मल्चिंग तकनीक का उपयोग कर टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, पत्तागोभी, भिंडी, खीरा समेत कई मौसमी सब्जियों की खेती कर रही हैं।

भोपाल की मंडियों तक पहुंच रही उपज

महिलाओं द्वारा उत्पादित ताजी और गुणवत्तापूर्ण सब्जियों की मांग अब आसपास के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ भोपाल की थोक सब्जी मंडियों तक पहुंच चुकी है। नियमित विपणन व्यवस्था के कारण उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है, जिससे उनकी आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

आधुनिक तकनीक से मिली नई पहचान

समूह की महिलाओं का कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण, सामूहिक कार्य करने का अवसर और बेहतर बाजार उपलब्ध हुए। इससे खेती पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बनी है। महिलाएं अब आत्मविश्वास के साथ खेती कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

शिक्षा और परिवार पर भी सकारात्मक असर

बढ़ी हुई आय का सकारात्मक असर महिलाओं के परिवारों पर भी दिखाई दे रहा है। अतिरिक्त आमदनी से वे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और परिवार की अन्य आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर रही हैं। इससे ग्रामीण परिवारों का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है।

अन्य गांवों के लिए बनी मिसाल

मानपुरा देव की यह पहल साबित करती है कि यदि महिलाओं को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और सही मार्गदर्शन मिले तो वे न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे गांव की आर्थिक तस्वीर बदल सकती हैं। आज यह गांव स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, आधुनिक कृषि और ग्रामीण आजीविका का प्रेरणादायी मॉडल बनकर अन्य गांवों के लिए भी उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

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