राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास, एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को मिला GI टैग

02 जुलाई 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास, एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को मिला GI टैग – मध्यप्रदेश ने उद्यानिकी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों के लिए भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त किया है। देश में पहली बार किसी राज्य को एक साथ इतनी बड़ी संख्या में उद्यानिकी फसलों के लिए GI टैग मिला है। इस उपलब्धि से प्रदेश की पारंपरिक फसलों को नई पहचान मिलने के साथ किसानों को बेहतर बाजार और निर्यात के अवसर भी मिलेंगे।

GI टैग प्राप्त करने वाली फसलों में गुना का कुम्भराज धनिया, नरसिंहपुर बरमान घाट का बैंगन, बैतूल का गजरिया आम, खरगोन की लाल मिर्च, मांडू की खुरासानी इमली, जबलपुर की हरी मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू, मालवी गराड़ू, नरसिंहपुर का गुड़, जबलपुर का सिंघाड़ा और आलीराजपुर का नूरजहां आम शामिल हैं।

इन उत्पादों के लिए भी भेजा गया प्रस्ताव

राज्य सरकार ने उज्जैन की इमली, आलीराजपुर के अचारी आम, मालवा के सफेद प्याज, झाबुआ के दाल पानिया, मंदसौर के देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी, अशोकनगर की खिरनी, रतलाम-सैलाना की बालम ककड़ी, बुरहानपुर के केले, इंदौरी जीरावन और छतरपुर के पान सहित अन्य उत्पादों को GI टैग दिलाने के लिए भी प्रस्ताव भेजा है।

किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से उद्यानिकी फसलों की खेती को अपनाने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की खेती की जा रही है, जिसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है।

इन फसलों की है खास पहचान

GI टैग प्राप्त करने वाली सभी फसलें अपनी गुणवत्ता, स्वाद और क्षेत्रीय विशेषताओं के कारण देशभर में अलग पहचान रखती हैं।

  • कुम्भराज धनिया: कुम्भराज धनियाअपनी तेज सुगंध, बेहतर स्वाद और उच्च गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है। गुना जिले में इसका सालाना उत्पादन करीब 32 हजार मीट्रिक टन होता है और इसका निर्यात भी किया जाता है।
  • बरमान घाट: बरमान घाट का बैंगन नर्मदा नदी के किनारे की रेतीली मिट्टी में उगने के कारण अपने खास स्वाद के लिए जाना जाता है।
  • बैतूल का गजरिया आम:  बैतूल का गजरिया आम  अपनी पारंपरिक किस्म और विशेष स्वाद के कारण अलग पहचान रखता है।
  • खरगोन की लाल मिर्च: देश के साथ-साथ विदेशों तक निर्यात की जाती है और निमाड़ क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसल है।
  • मांडू की खुरासानी इमली:  मांडू की खुरासानी इमली ऐतिहासिक महत्व वाली विशेष किस्म है, जिसे मांडवी इमली के नाम से भी जाना जाता है।
  • सिवनी का सीताफल: बड़े आकार और बेहतर स्वाद के कारण बाजार में अच्छी मांग रखता है।
  • मालवी आलू: अपनी गुणवत्ता और प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त होने के कारण विशेष पहचान रखता है।
  • मालवी गराड़ू: मालवा क्षेत्र का पारंपरिक कंद है, जिसका उपयोग कई पारंपरिक व्यंजनों में किया जाता है।
  • जबलपुर की हरी मटर: कम अवधि में तैयार होने वाली पौष्टिक फसल है और जिले में बड़े पैमाने पर इसकी खेती होती है।
  • नरसिंहपुर का गुड़: अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र मध्यप्रदेश का ‘चीनी का कटोरा’ भी कहलाता है।
  • जबलपुर का सिंघाड़ा: पोषण से भरपूर होता है और इसकी खेती से हजारों किसान जुड़े हुए हैं।
  • आलीराजपुर का नूरजहां आम: अपने विशाल आकार के कारण देशभर में मशहूर है। इसका एक फल 3 से 3.5 किलोग्राम तक वजन का हो सकता है।

GI टैग से किसानों को होगा फायदा

GI टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी और निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे। साथ ही प्रदेश की पारंपरिक कृषि विरासत को भी नई पहचान मिलेगी।

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