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राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि आदान विक्रेताओं की हड़ताल में खरगोन भी शामिल रहा

28 अप्रैल 2026, (दिलीप दसौंधी, कृषक जगत, मंडलेश्वर): कृषि आदान विक्रेताओं की हड़ताल में खरगोन भी शामिल रहा – एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन नई दिल्ली के आह्वान पर देश -प्रदेश के कृषि आदान व्यापारियों ने सोमवार को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। जिसमें  जिला खरगोन भी शामिल रहा । जिला स्तर पर कृषि आदान विक्रेता संघ, खरगोन ने कलेक्टर भव्या मित्तल के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपा। खरगोन जिला अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह चावला ने कहा  कि  संगठन पिछले एक दशक से लगातार अपनी समस्याएं उठा  रहा है , लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। मजबूरी में  विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा।

लिंकिंग बंद हो, मार्जिन बढ़े – व्यापारियों ने अपनी प्रमुख मांगों में उर्वरक कंपनियों द्वारा सब्सिडी वाले खाद के साथ अन्य उत्पादों की जबरन लिंकिंग को तत्काल बंद करने की मांग की है। इसके अलावा खाद की आपूर्ति सीधे विक्रय केंद्र तक सुनिश्चित करने और परिवहन लागत का बोझ व्यापारियों पर न डालने की बात कही गई है।साथ ही उर्वरकों पर न्यूनतम 8 प्रतिशत मार्जिन तय करने की मांग भी उठाई गई है।

‘ साथी’ पोर्टल और लाइसेंस प्रक्रिया पर भी सवाल – व्यापारियों ने ‘साथी’ पोर्टल को ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक बनाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि तकनीकी समस्याओं के कारण छोटे और ग्रामीण व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।इसके अलावा लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाने और निरीक्षण प्रणाली में पारदर्शिता लाने की मांग भी की गई है।

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अवैध बीज बिक्री और खराब स्टॉक पर सख्ती की मांग – ज्ञापन में अवैध बीज बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण लगाने की बात कही गई है। व्यापारियों ने यह भी मांग की कि एक्सपायरी कीटनाशक और खराब स्टॉक को वापस लेने की जिम्मेदारी कंपनियों की तय की जाए।साथ ही पैकिंग में त्रुटि पाए जाने पर विक्रेताओं को दोषी न ठहराने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।

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हड़ताल का असर – हड़ताल के चलते जिले के कई स्थानों पर कृषि आदान की दुकानें बंद रहीं, जिससे खाद और बीज लेने पहुंचे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। खरीफ सीजन नजदीक होने के कारण किसानों ने चिंता जताई कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो खेती की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।व्यापारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक और तीव्र रूप दिया जाएगा।

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