भारत सरकार बीज और कीटनाशक कानूनों को सख्त बनाने की तैयारी में
मिलावट और धोखाधड़ी पर सख्त कानूनी कार्रवाई
27 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: भारत सरकार बीज और कीटनाशक कानूनों को सख्त बनाने की तैयारी में – 24 अप्रैल को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत सरकार बीज अधिनियम और कीटनाशक अधिनियम में कड़े प्रावधान लाने की तैयारी कर रही है, ताकि किसानों को धोखा देने और मिलावटी उत्पाद फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान कानूनी व्यवस्था नकली बीज और नकली कीटनाशकों से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से सख्त नहीं है, और कई मामलों में केवल मामूली जुर्माने का प्रावधान है, जो दोषियों के लिए प्रभावी रोक नहीं बन पाता।
ये टिप्पणियाँ उत्तरी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान की गईं, जिसका आयोजन भारत सरकार द्वारा उत्तर भारत में कृषि और खेती को नई दिशा देने के व्यापक प्रयास के तहत किया गया है।
भारत में क्षेत्र-विशिष्ट कृषि योजना पर जोर
मीडिया को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि भविष्य का कृषि विकास अब सभी क्षेत्रों के लिए एक समान नीति से संचालित नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अब योजना क्षेत्रीय आवश्यकताओं, जलवायु परिस्थितियों, जल उपलब्धता और स्थानीय फसल स्थितियों के अनुसार आगे बढ़नी चाहिए। उनके अनुसार, इसी कारण भारत को पाँच क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, और क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियाँ तैयार करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। लखनऊ सम्मेलन इस प्रक्रिया का दूसरा चरण है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार के पास कृषि विकास के लिए योजनाएँ, वैज्ञानिक संस्थान और प्रशासनिक क्षमता है, लेकिन कृषि राज्य का विषय है। इसलिए सफल क्रियान्वयन राज्य सरकारों के सहयोग पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर आगामी खरीफ और रबी सीजन के लिए ठोस रोडमैप तैयार कर रही हैं, साथ ही किसानों की आय, उत्पादन और बाजार से जुड़े व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है।
किसानों की आय, ऋण और उत्पादकता पर फोकस
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चर्चा अब केवल मौसमी फसल योजना तक सीमित नहीं है। सम्मेलन के एजेंडे में कृषि विविधीकरण, लाभप्रदता, दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, बागवानी प्रोत्साहन और प्रसंस्करण अवसर भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में नए रिकॉर्ड बनाए हैं और गेहूं तथा धान उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता अब भी राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
चौहान के अनुसार, भारत सरकार की कृषि रणनीति छह स्तंभों पर आगे बढ़ रही है—उत्पादन बढ़ाना, खेती की लागत कम करना, किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य दिलाना, नुकसान होने पर मुआवजा सुनिश्चित करना, विविधीकरण को बढ़ावा देना और खेती को बाजार से जोड़ना। उन्होंने कहा कि भविष्य में केवल गेहूं-धान आधारित कृषि पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा, इसलिए दलहन, तिलहन, बागवानी, फल, सब्जियाँ, खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने छोटे किसानों की स्थिति पर भी प्रकाश डाला, विशेषकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां बड़ी संख्या में किसान छोटे जोतों पर खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि फसलों के साथ फल, सब्जियाँ, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और वृक्ष आधारित खेती को जोड़ने वाले एकीकृत कृषि मॉडल छोटे क्षेत्र से अधिक आय दिला सकते हैं। भारत सरकार ने ऐसे मॉडल तैयार किए हैं और उन्हें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार राज्यों के साथ साझा किया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चौहान ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना पर विशेष जोर दिया और कहा कि हर पात्र किसान को इसका लाभ दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि समय पर और सस्ती दर पर ऋण मिलने से किसान बेहतर बीज, उर्वरक, मशीनरी और अन्य संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे, जिससे उत्पादकता और आय दोनों बढ़ेंगी।
उर्वरक राहत और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
उन्होंने किसान आईडी को कृषि प्रशासन में बड़ा सुधार बताते हुए कहा कि इससे भूमि अभिलेख, खसरा नंबर, पशुधन विवरण और किसान से जुड़ी अन्य जानकारियाँ एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी। इससे बार-बार कागजात लेकर कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक तेज़ी और लक्षित तरीके से मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि करोड़ों किसान आईडी पहले ही बन चुकी हैं और राज्यों को शेष कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
उर्वरक कीमतों पर मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में अतिरिक्त 41,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, ताकि यूरिया 266 रुपये प्रति बैग और डीएपी 1,350 रुपये प्रति बैग की दर पर उपलब्ध रहे।
मिलावट और नकली कृषि आदानों के मुद्दे पर चौहान ने कहा कि यह केवल किसानों की फसल का मामला नहीं है, बल्कि मानव स्वास्थ्य से भी जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि फलों, सब्जियों और अन्य खाद्य उत्पादों में मिलावट तथा रसायनों के असंतुलित उपयोग से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं। भारत सरकार राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है और साथ ही नकली एवं मिलावटी कृषि उत्पादों के खिलाफ अभियान भी चला रही है।
उन्होंने स्वीकार किया कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को शुरुआती वर्षों में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए प्रति हेक्टेयर वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है ताकि इस बदलाव के दौरान किसान स्वयं को असहाय महसूस न करें।
लखनऊ में आयोजित यह सम्मेलन उत्तर भारत के लिए नीतिगत और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी सिफारिशें आगामी खरीफ और रबी सीजन की तैयारियों का मार्गदर्शन करेंगी और किसानों की आय, फसल विविधीकरण, पोषण सुरक्षा, तकनीक हस्तांतरण और टिकाऊ कृषि से जुड़े भविष्य के कदम तय करने में सहायक होंगी। चौहान ने कहा कि व्यापक लक्ष्य कृषि को क्षेत्र-विशिष्ट, विज्ञान-आधारित, बाजार से जुड़ा और लाभकारी बनाना है, जबकि हर नीति निर्णय के केंद्र में किसान को रखना है।
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