राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

ICAR–CCARI का फील्ड डे: गोवा में वैज्ञानिक खेती का नया मॉडल, सुपर नेपियर से चारा संकट होगा खत्म  

25 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: ICAR–CCARI का फील्ड डे: गोवा में वैज्ञानिक खेती का नया मॉडल, सुपर नेपियर से चारा संकट होगा खत्म – गोवा के उत्तर गोवा जिले के वालपोई तालुका के केरी गांव में भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, उत्तर गोवा तथा भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR–CCARI), गोवा की ओर से “सुपर नेपियर घास के माध्यम से वर्षभर हरा चारा उत्पादन” विषय पर फील्ड डे का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग, गोवा डेयरी, कृषि विभाग तथा आत्मा (उत्तर गोवा) के सहयोग से किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को उन्नत चारा उत्पादन तकनीकों से जोड़ना और डेयरी क्षेत्र में हरे चारे की उपलब्धता को सुनिश्चित करना था।

कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने बताया कि सुपर नेपियर घास की खेती से पूरे वर्ष पशुओं के लिए पौष्टिक हरे चारे की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। इससे न केवल पशुओं का स्वास्थ्य और दूध उत्पादन बढ़ता है, बल्कि महंगे सघन पशु आहार पर निर्भरता भी कम होती है, जिससे किसानों की उत्पादन लागत घटती है। कार्यक्रम में मौसमी चारा फसलों, बहुवर्षीय दलहनी चारा फसलों, चारा वृक्षों और साइलेज निर्माण को अपनाने पर भी जोर दिया गया।

सुपर नेपियर खेती की तकनीक और फायदे

फील्ड डे के दौरान सुपर नेपियर घास की खेती की तकनीक जैसे रोपण विधि, पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई, कटाई और संरक्षण के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह घास तेजी से बढ़ती है, अधिक जैव द्रव्यमान देती है और कई बार कटाई की जा सकती है। इसकी पत्तियों और तनों का संतुलन बेहतर होता है, जो गर्म और आर्द्र जलवायु के लिए उपयुक्त है। इससे पशुओं का पाचन बेहतर होता है और दूध उत्पादन में वृद्धि होती है।

किसानों के अनुभव और नवाचार

केरी गांव के प्रगतिशील किसान श्री प्रशांत राणे ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे 1.5 एकड़ भूमि पर सुपर नेपियर की खेती कर रहे हैं। वे जैविक इनपुट्स जैसे जीवामृत और घन जीवामृत का उपयोग कर बेहतर उत्पादन ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्पादन इतना अधिक है कि वे अपनी जरूरत पूरी करने के साथ-साथ अतिरिक्त चारा अन्य किसानों को भी बेचते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि चारे की कमी वाले समय के लिए वे साइलेज (संरक्षित चारा) भी तैयार करते हैं।

किसान–वैज्ञानिक संवाद बना सफल मंच

यह फील्ड डे किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद का प्रभावी मंच साबित हुआ। किसानों ने खेत में जाकर सुपर नेपियर की खेती का प्रत्यक्ष अवलोकन किया, तकनीक को समझा और अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया। कई किसानों ने इस तकनीक को अपनाने में गहरी रुचि दिखाई। कार्यक्रम में कुल 29 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 28 पुरुष और 1 महिला किसान शामिल थीं। 

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