कटनी : पीली पड़ रही हैं धान की पत्तियां तो हो जाएं सावधान
18 सितंबर 2026, कटनी: कटनी : पीली पड़ रही हैं धान की पत्तियां तो हो जाएं सावधान – खरीफ सीजन में धान की फसल अब बाली की अवस्था में पहुंच चुकी है। बदलते मौसम के बीच गर्म तापमान और उच्च आर्द्रता धान में भूरा माहू (बीपीएच) के प्रकोप के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहे हैं। जिले में धान की फसल में भूरा माहू के प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को विशेष सतर्कता बरतने तथा खेतों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है।
कृषि विभाग ने बताया कि भूरा माहू के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर समय रहते नियंत्रण उपाय अपनाना जरूरी है। इसका प्रकोप प्रायः खेत के किनारे अथवा मेड़ के पास से शुरू होता है। प्रभावित पौधों की पत्तियां पहले पीली पड़ती हैं, फिर भूरी होने लगती हैं और धीरे-धीरे सूखने लगती हैं। खेत में प्रभावित क्षेत्र कई बार गोल चकत्तों के रूप में दिखाई देता है।
पत्तियां पीली पड़ें तो तुरंत जांचें फसल – कीट की पहचान के लिए पौधे के जमीन के पास तने के निचले हिस्से को ध्यान से देखें। यहां भूरे रंग के माहू दिखाई दे सकते हैं। पौधे के तने को हिलाने या झटकने पर पानी की सतह पर भूरे अथवा सफेद रंग के छोटे कीट दिखाई देना भी इसके प्रकोप का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर किसान प्रभावित क्षेत्र की तत्काल जांच कर आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाएं।
जल निकासी कर खेत को दो-तीन दिन रखें सूखा – भूरा माहू के नियंत्रण में जल प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका है। कृषि विभाग ने किसानों को खेत में अनावश्यक पानी जमा न रहने देने तथा उचित जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी है। आवश्यकता अनुसार खेत को दो-तीन दिन सूखा रखने का प्रयास करें। धान में नाइट्रोजन युक्त उर्वरक, विशेषकर यूरिया का अत्यधिक उपयोग न करें तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं। खेत की मेड़ों को घास एवं खरपतवार से मुक्त रखना भी जरूरी है।
इनमें से किसी एक रासायनिक दवा का करें उपयोग – रासायनिक नियंत्रण के लिए कृषि विभाग ने निम्न में से किसी एक दवा के उपयोग की सलाह दी है—पायमेट्रोजिन 50 प्रतिशत डब्लूजी — 300 ग्राम/हेक्टेयरडायनोटेफ्यूरोन 70 प्रतिशत डब्लूजी — 85 ग्राम/हेक्टेयरडायनोटेफ्यूरोन 20 प्रतिशत एसजी — 250 ग्राम/हेक्टेयरडायनोटेफ्यूरोन 15 प्रतिशत डब्लूजी + पायमेट्रोजिन 45 प्रतिशत डब्लूजी — 330 ग्राम/हेक्टेयर थायोमेथोक्जाम 25 प्रतिशत डब्लूजी — 100-120 ग्राम/हेक्टेयरइमीडाक्लोरोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल — 200-250 मिलीलीटर/हेक्टेयरफिप्रोनिल 3 प्रतिशत + ब्यूप्रोफेजिन 22 प्रतिशत — 500 मिलीलीटर/हेक्टेयरब्यूप्रोफेजिन 15 प्रतिशत + एसीफेट 35 प्रतिशत — 50 ग्राम/हेक्टेयर 500 लीटर पानी में करें छिड़काव।
कृषकों को दवा के छिड़काव के लिए 500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर उपयोग करने की सलाह दी गई है। छिड़काव के दौरान पौधे को अच्छी तरह गीला करें, ताकि दवा पौधे के निचले हिस्से तक प्रभावी रूप से पहुंच सके। दवा के प्रभाव को बढ़ाने के लिए रासायनिक दवा के साथ सिलीकोन/चिपको स्प्रेडर का उपयोग करने की सलाह भी दी गई है।
सतत निगरानी से बचाई जा सकती है फसल – कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि धान की वर्तमान बाली अवस्था को देखते हुए खेतों की नियमित एवं सतत निगरानी करें। विशेष रूप से खेत के किनारों, मेड़ों तथा पौधों के निचले हिस्से की जांच करें। पत्तियां पीली या भूरी पड़ने अथवा गोल चकत्ते दिखाई देने पर तत्काल आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाएं। समय पर पहचान, उचित जल प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और अनुशंसित रासायनिक नियंत्रण उपायों से भूरा माहू के प्रकोप से फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
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