पांढुर्णा के किसान ने वैज्ञानिक डेयरी फार्मिंग से बदली तकदीर, रोज 180 लीटर दूध का उत्पादन; आमदनी बढ़ी
18 सितंबर 2026, पांढुर्णा: पांढुर्णा के किसान ने वैज्ञानिक डेयरी फार्मिंग से बदली तकदीर, रोज 180 लीटर दूध का उत्पादन; आमदनी बढ़ी – मध्यप्रदेश के पांढुर्णा जिले के ग्राम सावरगांव निवासी नवनीत गोपाल महेश्वरी के परिवार में पहले से ही दुग्ध उत्पादन की परंपरा रही है। हालांकि, उन्नत नस्ल के पशुओं की कमी और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन नहीं किए जाने के कारण दुग्ध उत्पादन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा था। ऐसे में उन्होंने पशुपालन को नए तरीके से करने का संकल्प लिया और विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में आगे बढ़े।
वर्ष 2017-18 में महेश्वरी को एक साहीवाल नंदी नाटा प्रदाय किया गया। इसके बाद वर्ष 2021 में वे पशुपालन केसीसी योजना से जुड़े और वर्ष 2025 तक इसका लाभ लेते रहे। योजना के तहत उन्हें 90 हजार रुपए तक का ऋण उपलब्ध हुआ। इस सहयोग से उनके डेयरी व्यवसाय को विस्तार देने में मदद मिली।
वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित किया डेयरी फार्म
वर्ष 2021 से श्री महेश्वरी ने संकर गाय एवं भैंस के साथ साहीवाल नंदी से प्राप्त पशुओं को शामिल कर अपने डेयरी फार्म को व्यवस्थित करना शुरू किया। उन्होंने पशुओं की संख्या बढ़ाने के साथ उनके स्वास्थ्य, पोषण और नस्ल सुधार पर भी ध्यान दिया। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने फार्म प्रबंधन में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया।
उन्होंने पशुओं का नियमित टीकाकरण और स्वास्थ्य परीक्षण कराया। बीमार पशुओं का समय पर उपचार कराया और प्राकृतिक गर्भाधान की जगह कृत्रिम गर्भाधान का उपयोग किया। इससे पशुओं की प्रजनन दर और नस्ल में सुधार हुआ। पशुओं के बेहतर पोषण के लिए आयु के अनुसार संतुलित आहार देना शुरू किया गया। हरा चारा, भूसा, सुदाना और मिनरल मिक्सचर को पशु आहार में शामिल किया गया। हरे चारे की उपलब्धता के लिए फार्म में ही नेपियर घास और अन्य चारा फसलों का उत्पादन भी शुरू किया गया।
रोज 180 लीटर दूध का उत्पादन
धीरे-धीरे इन प्रयासों का असर दिखाई देने लगा। दुग्ध उत्पादन बढ़ा और दूध की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ। वर्तमान में श्री महेश्वरी के फार्म से प्रतिदिन लगभग 180 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। उत्पादित दूध को 50 रुपए प्रति लीटर की दर से पांढुर्णा की डेयरी में बेचा जा रहा है। इससे परिवार की आमदनी बढ़ी और पशुपालन आय का मजबूत स्रोत बन गया।
सेक्स्ड सॉर्टेड सीमेन से तैयार किया प्रतिस्थापन पशु-झुंड
श्री महेश्वरी ने फार्म में कृत्रिम गर्भाधान के साथ विशेष रूप से sexed sorted semen का उपयोग करते हुए उन्नत नस्ल का प्रतिस्थापन पशु-झुंड तैयार किया। इससे नए पशुओं की खरीद पर होने वाली पूंजीगत लागत को कम करने में मदद मिली। उनका डेयरी फार्म अब आधुनिक एवं वैज्ञानिक पशुपालन का उदाहरण बन रहा है।
दूसरे पशुपालकों को भी मिली प्रेरणा
श्री नवनीत गोपाल महेश्वरी की सफलता अब केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी मेहनत और सफलता से प्रेरित होकर क्षेत्र के अन्य पशुपालक, विशेषकर महिलाएं भी छोटे स्तर पर पशुपालन से जुड़ने लगी हैं। पशु चिकित्सा अधिकारियों के मार्गदर्शन में वे पशुपालन को आय के मुख्य स्रोत के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। श्री महेश्वरी की सफलता की कहानी बताती है कि मेहनत, विभागीय मार्गदर्शन और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धति को अपनाकर पशुपालन को परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बनाया जा सकता है।
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