राज्य कृषि समाचार (State News)

पशुपालन एवं इंदौर सहकारी दुग्ध संघ के अधिकारियों की संयुक्त बैठक संपन्न  

30 मई 2025, इंदौर: पशुपालन एवं इंदौर सहकारी दुग्ध संघ के अधिकारियों की संयुक्त बैठक संपन्न – संभागायुक्त श्री दीपक सिंह ने  संभागायुक्त कार्यालय में इंदौर संभाग में पदस्थ पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों और इंदौर सहकारी दुग्ध संघ के अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली। इस बैठक में उन्होंने उक्त विभागों से संबंधित गतिविधियों, कार्यक्रमों, योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति की जिलेवार समीक्षा की। बैठक में श्री सिंह ने निर्देश दिये कि दुग्ध उत्पादन की लक्ष्य पूर्ति को पूरा करने के लिये उन्नत किस्म के पशुधन को बढ़ाया  जाए । पशुओं को उन्नत किस्म का आहार दिया जाये। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस का समस्त जिलों में विस्तार किया जाये। साथ ही वृहद स्वावलंबी गौशालाओं के माडल तैयार कर निराश्रित गोवंश का उपयुक्त  व्यवस्थापन किया  जाए । पशुपालकों को पशुपालन के लिये किसान क्रेडिट कार्ड की उपलब्धता सुनिश्चित कराएं । हितग्राहियों को अधिक से अधिक सुविधाएं दी   जाएं ।

बैठक में बताया गया कि देश में दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश का तीसरा स्थान है। मध्यप्रदेश में प्रतिदिन 551 लाख किलोग्राम दुग्ध उत्पादन होता है, जो राष्ट्र का 9 प्रतिशत है। प्रदेश में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 644 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 459 ग्राम प्रतिदिन है। प्रदेश में गौवंशी पशु,  भैंस वंशीय पशु,  बकरे-बकरियां और कुक्कुट पालन ठीक प्रकार से किया जा रहा है। सभी जिला मुख्यालय में चलित पशु चिकित्सा इकाई है। पशुधन को होने वाले विभिन्न रोगों से बचाव हेतु उनका समय-समय टीकाकरण किया जाता है।

बैठक में बताया गया कि भारत सरकार द्वारा पशुपालकों के लिये किसान क्रेडिट कार्ड योजना का ठीक से क्रियान्वयन हो रहा है। इस योजना का उद्देश्य पशुपालकों को कम ब्याज दर पर आवश्यक कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना। राज्य शासन द्वारा द्वारा वर्ष 2016 से जारी आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना चलाई जा रही है। इस योजना से जहां दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो रही है वहीं हितग्रहियों की आर्थिक स्थिति भी सुधर रही है। साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ रहे है।  मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना में नवीन खटक डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना प्रगतिरत है। इस योजना में एक इकाई में एक ही नस्ल के गौवंशीय भैंस पशु रहेंगे। हितग्राही के पास न्यूनतम 3.50 एकड़ कृषि भूमि होना आवश्यक है।

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