राज्य कृषि समाचार (State News)

जबलपुर : एमआरपी से अधिक कीमत पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं पर होगी कार्रवाई

19 जून 2026, जबलपुर: जबलपुर : एमआरपी से अधिक कीमत पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं पर होगी कार्रवाई – जिले में उर्वरकों की बिक्री केवल पैकेट पर दर्ज अधिकतम खुदरा मूल्य या उससे कम कीमत पर ही की जा सकेगी। यदि कोई भी सहकारी समिति या निजी विक्रेता निर्धारित मूल्य से एक भी रुपया अधिक वसूलता पाया गया, तो उसके खिलाफ वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई होगी। इस संबंध में कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये हैं।

 उप संचालक कृषि उमेश कुमार कटहरे ने इन दिशा निर्देशों की जानकारी देते हुये बताया कि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के नियमों के तहत कोई भी डीलर, निर्माता या आयातक निर्धारित अधिकतम मूल्य से अधिक दाम पर उर्वरकों की बिक्री नहीं कर सकता। ऐसा करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जायेगी। उप संचालक कृषि ने बताया कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में ‘ई-विकास’ प्रणाली के माध्यम से उर्वरकों की बिक्री की जा रही है। किसानों की जागरूकता के लिए खाद के दाम तीन अलग-अलग स्तरों-उर्वरक की बोरी, ई-विकास पोर्टल एवं पीओएस मशीन-पर प्रदर्शित हो रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद का भंडारण और बिक्री एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसके कारण कुछ विक्रेताओं के पास पुराने मूल्य का स्टॉक उपलब्ध हो सकता है। यदि ई-टोकन या पीओएस मशीन में उर्वरक का मूल्य अधिक दर्ज दिखाई देता है, लेकिन खाद की बोरी पर छपा हुआ मूल्य (एम आर पी ) उससे कम है, तो विक्रेता को बोरी पर दर्ज कम मूल्य के अनुसार ही किसानों को खाद देनी होगी। किसी भी परिस्थिति में किसानों से बोरी पर दर्ज दाम से अधिक राशि नहीं वसूली जा सकती।

गड़बड़ी मिलने पर होगी कार्रवाई – उप संचालक कृषि ने बताया कि कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने जिले में किसानों को सही दाम पर उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को निरंतर मैदानी निरीक्षण करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने किसानों से खाद खरीदते समय बोरी पर लिखे दाम जरूर देखने और विक्रेता से पक्की रसीद लेने की अपील की है। किसानों से आग्रह किया गया है कि यदि कोई भी निजी उर्वरक विक्रेता या सहकारी समिति तय मूल्य से अधिक की मांग करती है, तो इसकी शिकायत तुरंत कृषि विभाग के संबंधित कार्यालय में करें, ताकि दोषी विक्रेता के विरुद्ध तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सके।

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