मसूर-अलसी की अंतरवर्तीय खेती से चमकी किसान की किस्मत, कम लागत में मिला ज्यादा मुनाफा
18 मई 2026, भोपाल: मसूर-अलसी की अंतरवर्तीय खेती से चमकी किसान की किस्मत, कम लागत में मिला ज्यादा मुनाफा – वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक खेती पद्धतियों को अपनाकर किसान अब कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे ही एक प्रगतिशील किसान हैं श्री संग्राम सिंह दांगी, जिन्होंने अंतरवर्तीय खेती और वैज्ञानिक सलाह के जरिए खेती में नई सफलता हासिल की है। उनकी यह सफलता कहानी अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के किसान संग्राम सिंह दांगी ने फसल लगाने से पहले अपने खेत में नरवाई प्रबंधन अपनाया। उन्होंने फसल अवशेषों को जलाने के बजाय मिट्टी में ही मिला दिया। इससे खेत में जैविक पदार्थ और कार्बन की मात्रा बढ़ी, जिससे मिट्टी की उर्वरता मजबूत हुई।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नरवाई प्रबंधन से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और लंबे समय तक उत्पादन क्षमता बनी रहती है।
मसूर-अलसी की अंतरवर्तीय खेती का सफल प्रयोग
आत्मा परियोजना के अंतर्गत फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन में श्री दांगी ने एक एकड़ क्षेत्र में मसूर और अलसी की अंतरवर्तीय फसल लगाई। इसमें उन्होंने 20 किलो मसूर बीज और 2.5 किलो अलसी बीज का उपयोग किया।
इस आधुनिक खेती पद्धति से भूमि का बेहतर उपयोग हुआ और फसल जोखिम भी कम हुआ। परिणामस्वरूप उन्हें उम्मीद से कहीं बेहतर उत्पादन प्राप्त हुआ। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई और खेती अधिक लाभकारी साबित हुई।
तकनीकी मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी
श्री दांगी का कहना है कि बीज बुवाई से लेकर कटाई तक उन्हें कृषि विभाग और आत्मा परियोजना के तहत लगातार तकनीकी मार्गदर्शन मिलता रहा। नई जानकारी और वैज्ञानिक सलाह को खेत में अपनाने से उन्हें अच्छे परिणाम प्राप्त हुए। उन्होंने बताया कि सही तकनीक और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से खेती में लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में काफी मदद मिली।
आईएनएम तकनीक से बढ़ी मिट्टी की उर्वरता
किसान संग्राम सिंह दांगी ने एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) तकनीक अपनाई। इसके तहत उन्होंने जैविक और अजैविक दोनों प्रकार के पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग किया।
इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ी, उत्पादन में कमी नहीं आई और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ। उनका कहना है कि मिट्टी की सेहत बेहतर होने से खेती लंबे समय तक लाभकारी बनी रहती है।
अब प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे कदम
नरवाई प्रबंधन और आईएनएम तकनीक के सकारात्मक परिणाम देखने के बाद अब श्री दांगी ने पूरी तरह प्राकृतिक खेती अपनाने का निर्णय लिया है।
वे कहते हैं कि “जो किसान सीखता है, वही आगे बढ़ता है।” उनके अनुसार मिट्टी की सेहत ही किसान की सबसे बड़ी संपत्ति है और वैज्ञानिक सोच के साथ प्राकृतिक संतुलन अपनाकर ही खेती को समृद्ध बनाया जा सकता है। श्री संग्राम सिंह दांगी की यह सफलता कहानी बताती है कि यदि किसान नई तकनीकों, अंतरवर्ती खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को अपनाएं, तो कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय हासिल की जा सकती है।
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