राज्य कृषि समाचार (State News)

रीवा में मछलीपालक किसानों के लिए बीमा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

14 फरवरी 2026, रीवारीवा में मछलीपालक किसानों के लिए बीमा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित – प्रधानमंत्री मत्स्य कृषक समृद्धि सह योजना के अंतर्गत मछलीपालक किसानों और मछुआरों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। मछलीपालक किसानों और मछुआरों को बीमा योजना का लाभ दिया जाएगा।

कलेक्ट्रेट के बाणसागर सभागार में आयोजित बीमा जागरूकता कार्यक्रम में उप संचालक मछलीपालन विभाग डॉ. अंजना सिंह ने बताया कि जलीय कृषि से जुड़े किसानों के लिए बीमा योजना सुरक्षा कवच का कार्य करेगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत नेशनल फिशरीज डिजिटल पोर्टल पर बीमा उत्पाद उपलब्ध कराए गए हैं, जहां मछलीपालक किसान ऑनलाइन पंजीयन कर बीमा खरीद सकते हैं और सीधे एकमुश्त प्रोत्साहन राशि का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। जिले में मछली पालन को संगठित, सुरक्षित और लाभकारी बनाने के लिए विभाग निरंतर प्रयासरत है। जलीय कृषि बीमा योजना से न केवल मत्स्यपालकों का जोखिम कम होगा, बल्कि जिले में मत्स्य उत्पादन को भी नई दिशा और गति मिलेगी।

बीमा जागरूकता कार्यक्रम राष्ट्रीय मत्स्यकीय विकास बोर्ड हैदराबाद द्वारा निर्देश के अनुपालन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से मत्स्य पालकों को योजना के तहत लागू मत्स्य पालन बीमा योजना की विस्तृत जानकारी दी गई, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं,रोग अथवा अन्य जोखिमों से होने वाले नुकसान की भरपाई कर मत्स्य पालकों को वित्तीय संबल प्रदान करना है।

कार्यक्रम में एनएफडीबी के विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन वेबिनार के माध्यम से बीमा योजना की प्रक्रिया, शर्तें और लाभों की विस्तार से जानकारी दी गई। मछलीपालक किसानों को बताया गया कि योजना के अंतर्गत बीमा प्रीमियम का 40 प्रतिशत भाग भारत सरकार द्वारा प्रोत्साहन स्वरूप वहन किया जाएगा। प्रति किसान अधिकतम 4 हेक्टेयर जलक्षेत्र तक बीमा पर प्रोत्साहन देय होगा, जिसकी अधिकतम सीमा एक लाख रुपये निर्धारित की गई है। कार्यक्रम के दौरान मत्स्यपालकों को एनएफडीपी पोर्टल पर पंजीयन एवं बीमा कराने में सीएससी अधिकारियों का सहयोग लेने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि अधिक से अधिक किसान योजना का लाभ उठा सकें। कार्यक्रम में जिले के चयनित मछलीपालक विशेषकर झींगा एवं उन्नत मछलीपालन से जुड़े अनुभवी किसान स्टाफ, सीएससी अधिकारियों की उपस्थिति रही।

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