नरवाई जलाने की घटनाओं को नियंत्रित करने के निर्देश

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16 अप्रैल 2022, इंदौर: मध्य प्रदेश में फसलों खासकर धान और गेहूं की फसल कटाई के पश्चात फसल अवशेषों (नरवाई ) को खेतों में जलाए जाने को प्रतिबंधित किया गया है।  इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि के दंड का भी प्रावधान भी किया गया है, इसके बावजूद भी इंदौर जिले में  नरवाई जलाने की घटनाएं हो रही है। इसे नियंत्रित करने के लिए कलेक्टर इंदौर ने राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। 

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पर्यावरण की सुरक्षा के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के परिपालन में मप्र में धान और गेहूं की फसल कटाई के पश्चात फसल अवशेषों (नरवाई ) को खेतों में जलाए जाने को प्रतिबंधित किया गया है। इसके व्यापक प्रचार -प्रसार के बाद भी इंदौर जिले में  नरवाई जलाने की घटनाएं हो रही है। सेटेलाइट मॉनिटरिंग में 13 अप्रैल को 25 गांवों में नरवाई जलाने की रिकार्ड घटनाएं हुई हैं। इससे चिंतित होकर इंदौर कलेक्टर श्री मनीष सिंह ने जिले के समस्त एसडीओ राजस्व,एसडीओ कृषि ,तहसीलदार और वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों को आज पत्र जारी कर तत्काल दल गठित कर , घटनाओं के समक्ष जाकर पंचनामा बनाने , फोटोग्राफ लेने , संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने और किसानों को नरवाई नहीं जलाने की समझाईश देने और दो दिन में संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। 

उल्लेखनीय है कि पर्यावरण विभाग मंत्रालय द्वारा पूर्व में जारी अधिसूचना  में नरवाई जलाने पर दो एकड़ से कम में 2 हजार 500 रूपए, दो एकड़ से पांच एकड़ तक 5 हजार रूपये एवं पांच एकड़ से अधिक पर नरवाई जलाने पर  15 हजार रूपये के  जुर्माना का प्रावधान किया गया है। 

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