किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)राज्य कृषि समाचार (State News)

मेहनत और तकनीकी मार्गदर्शन से उद्यानिकी कृषक को मिली सफलता

28 मई 2026, छिन्‍दवाड़ामेहनत और तकनीकी मार्गदर्शन से उद्यानिकी कृषक को मिली सफलता – जिले के अमरवाड़ा विकासखंड के ग्राम पिपरिया भारती के कृषक श्री विजय अहरवार ने अपनी मेहनत और उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से खेती में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी फसलों को अपनाया और अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव लाया है।

कृषक श्री विजय अहरवार के पास लगभग 1 एकड़ कृषि भूमि एवं सिंचाई हेतु नलकूप की सुविधा उपलब्ध थी। पहले वे खरीफ सीजन में मक्का तथा रबी सीजन में गेहूँ की खेती करते थे। इससे उन्हें वर्ष भर में लगभग 30 से 35 हजार रुपये की आय प्राप्त होती थी। उत्पादन की बात करें तो खरीफ में 1.5 टन मक्का एवं रबी में 1.8 टन गेहूँ का उत्पादन होता था। सीमित आय के कारण उनका मकान कच्चा था तथा आर्थिक स्थिति सामान्य थी।

वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग द्वारा आयोजित कृषक प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन कार्यक्रम से जुड़ने के बाद उनकी खेती की दिशा बदल गई। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें वैज्ञानिक तरीके से उद्यानिकी फसलों की खेती करने के लिए प्रेरित किया। अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने खरीफ सीजन में प्याज तथा रबी सीजन में टमाटर की खेती प्रारंभ की।

तकनीकी जानकारी, उचित प्रबंधन एवं समय पर सलाह के कारण कृषक श्री विजय अहरवार को उद्यानिकी फसलों में बेहतर उत्पादन प्राप्त हुआ। खरीफ सीजन में उन्होंने लगभग 10 टन प्याज तथा रबी सीजन में 8 टन टमाटर का उत्पादन प्राप्त किया। बाजार में फसलों का उचित मूल्य मिलने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और उन्हें दोनों फसलों से लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये का लाभ प्राप्त हुआ। उद्यानिकी फसलों से हुई अतिरिक्त आय ने उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया। आज उनका कच्चा मकान पक्के मकान में बदल चुका है तथा उन्होंने मोटरसाइकिल भी खरीदी है। अब वे आर्थिक रूप से पहले की तुलना में अधिक सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन चुके हैं।

कृषक श्री विजय अहरवार बताते हैं—“पहले मैं गेहूँ और मक्का की खेती करता था, जिससे सीमित आय होती थी। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने मुझे प्याज और टमाटर की वैज्ञानिक खेती के बारे में जानकारी दी। उनके मार्गदर्शन से मैंने उद्यानिकी फसलों की खेती शुरू की और मुझे अच्छा उत्पादन एवं बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त हुआ। आज मेरी आय बढ़ी है और जीवन स्तर में सुधार हुआ है। विभाग से समय-समय पर मिलने वाला मार्गदर्शन मेरे लिए बहुत उपयोगी साबित हो रहा है।”  श्री विजय अहरवार की यह सफलता अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह सफलता दर्शाती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, विभागीय योजनाओं एवं वैज्ञानिक खेती को अपनाएं, तो कम भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है।

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