घोटालों की नर्सरी बना उद्यानिकी विभाग

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घोटालों की नर्सरी बना उद्यानिकी विभाग

100 करोड़ की यंत्रीकरण योजना में घोटाला
नमामि देवी नर्मदे योजना में घोटाला

भोपाल। म.प्र. उद्यानिकी विभाग में केन्द्र प्रवर्तित यंत्रीकरण की योजना में करोड़ों रू. का घोटाला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2019-20 में तत्कालीन अधिकारियों ने किसानों को पावर टिलर के स्थान पर पावर विडर व पावर स्प्रेयर वितरित कर दिये। पावर टिलर की कीमत लगभग 1.50 लाख रू. होती है। जबकि पावर विडर और पावर स्प्रेयर 21 हजार से 52 हजार रू. तक के आते हैं। प्रदेश में इस योजना में कुल 1618 पॉवर टिलर किसानों को कथित रूप से प्रदाय किये गये।

इस घोटाले की शुरूआत मंदसौर में किसान की शिकायत पर लोकायुक्त जांच से प्रारम्भ हुई। लोकायुक्त जांच में स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मुख्यालय से प्राप्त निर्देशानुसार अनुदान की राशि कम्पनी के खाते में जमा की गई है। जबकि नियमानुसार अनुदान की राशि सीधे किसानों के खाते में जाना चाहिये। जब इस घोटाले की गूँज राजधानी तक पहुंची तो आनन-फानन में एक कमेटी बना कर जांच कराई गई।

शासन ने इस घोटाले की जांच के लिये एम.पी. एग्रो कॉर्पोरेशन लि. के प्रबंध संचालक श्री श्रीकांत बनोठ की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई थी। जिसमें 4 तकनीकी अधिकारी सदस्य थे। समिति ने सभी जिलों से योजना के अन्तर्गत वितरित यंत्रों को भोपाल बुलवाया था। सभी जिलों से 2-2 यंत्र अवलोकन हेतु बुलवाये गये थे। जांच के पश्चात समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।

सूत्रों के अनुसार आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने घोटाले के तार पूरे प्रदेश से जुड़े होने का हवाला देते हुए इसकी जांच अर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो या लोकायुक्त से कराने की अनुशंसा की है। संभावना है कि शीघ्र ही घोटाले की जांच लोकायुक्त को सौंपी जायेगी।

नमामि देवी नर्मदे योजना : पौधे लिये बिना भुगतान

वर्ष 2016 में नमामि देवी नर्मदे योजना में नर्मदा नदी के किनारे लगाने के लिये उद्यानिकी विभाग ने पौधों की खरीद की थी। इसमें लगभग ढाई लाख पौधे नर्सरी ने प्रदाय ही नहीं किये लेकिन उसका 2 करोड़ रू. का भुगतान कर दिया गया। इस घोटाले की जांच भी तब संभव हुई जब राजभवन से जांच के लिए उद्यानिकी विभाग पर दबाव आया। राजभवन में विभाग के ही अधिकारी ने शिकायत की थी क्योंकि उसके ऊपर मुख्यालय में बैठे वरिष्ठ अधिकारी नियम विरूद्ध जाकर नर्सरी को भुगतान का दबाव बना रहे थे। लगभग छ: माह पहले प्रारम्भ हुई जांच की रिपोर्ट हाल ही में मुख्यालय को सौंपी गई है। इसी प्रकरण में संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी को रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस ने पकड़ा भी था।

5 कंपनी, 3 राज्य, करोड़ों का घोटाला

उद्यानिकी विभाग की यंत्रीकरण योजना में करोड़ों के घोटाले में प्रथम दृष्टया 5 कम्पनियां दुर्ग इंटरप्राइजेज रायपुर, गणेश इंटरप्राइजेज जबलपुर, किसान एग्रीटेक गुजरात, छत्तीसगढ़ इंटरप्राइजेज दुर्ग और जेएम इंटरप्राइजेज दुर्ग के नाम आ रहे हैं। इन सभी कम्पनियों का सचालक एक ही व्यक्ति जिग्रेश पटेल बताया जाता है। सूत्रों के अनुसार येाजना में प्रदाय किये गये कुल 1618 पावर टिलर में से 1291 पावर टिलर इन्हीं 5 कम्पनियों ने सप्लाई किये थे।

रिपोर्ट का अध्ययन कर उचित निर्णय लिया जायेगा। किसी दोषी को बख्शा नहीं जायेगा

श्री भारत सिंह कुशवाह

उद्यानिकी मंत्री

म.प्र. शासन

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