राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश में शहरी गरीबों की मदद: स्वसहायता समूहों को 81 करोड़ का आर्थिक सहयोग

25 दिसंबर 2024, भोपाल: मध्यप्रदेश में शहरी गरीबों की मदद: स्वसहायता समूहों को 81 करोड़ का आर्थिक सहयोग – मध्यप्रदेश सरकार शहरी गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने और आजीविका के बेहतर साधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वसहायता समूहों को सशक्त बना रही है। नगरीय निकाय और बैंक मिलकर इन समूहों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रहे हैं।

अब तक राज्य के विभिन्न शहरी क्षेत्रों में 9318 स्वसहायता समूह बनाए गए हैं, जो 9000 से अधिक गरीब परिवारों को लाभान्वित कर रहे हैं। इन समूहों की आर्थिक मजबूती के लिए 642 एरिया लेवल फेडरेशन और 34 सिटी लेवल फेडरेशन का गठन भी किया गया है।

बैंक लिंकेज और आर्थिक सहायता

स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए 6720 स्वसहायता समूहों को 6.75 करोड़ रुपये की आवर्ती निधि प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, व्यक्तिगत ऋण के तहत 5723 हितग्राहियों को 77 करोड़ रुपये और समूहगत ऋण के रूप में 396 स्वसहायता समूहों को 11 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इसके अलावा, 3581 स्वसहायता समूहों को बैंक लिंकेज के माध्यम से 21.50 करोड़ रुपये का ऋण प्रदान किया गया है। यह आर्थिक सहयोग समूहों को आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाने में मदद कर रहा है।

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अमृत 2.0 और स्वच्छ भारत मिशन में योगदान

मध्यप्रदेश के 10 शहरों—जबलपुर, भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, छतरपुर, ग्वालियर, रीवा, छिंदवाड़ा, धार, और देवास—में अमृत 2.0 योजना के तहत 20 स्वसहायता समूहों को 56 लाख रुपये के कार्यादेश दिए गए हैं। ये समूह जल गुणवत्ता परीक्षण, सार्वजनिक पार्कों के संचालन, और स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रमों में योगदान दे रहे हैं।

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दूसरे चरण में राज्य के 45 अन्य नगरीय निकायों को इस योजना में शामिल किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 166 समूह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और सेनिटेशन जैसे कार्यों में जुटे हुए हैं।

खाद्य प्रसंस्करण और उद्यानिकी में भागीदारी

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना (पीएमएफएएमई) के अंतर्गत 126 स्वसहायता समूहों के 708 सदस्यों को 3 करोड़ रुपये खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों के लिए दिए गए हैं। दूसरे चरण में 103 समूहों के 600 सदस्यों के लिए 2 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है।

खाद्य प्रसंस्करण और उद्यानिकी गतिविधियों में प्रशिक्षित करने के लिए नियमित कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण में फसल प्रसंस्करण, उत्पाद गुणवत्ता प्रबंधन, और विपणन कौशल जैसे विषयों को शामिल किया गया है।

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