पंजाब में धान की सरकारी खरीद ने पकड़ी रफ्तार, एक हफ्ते में खरीद दोगुने से ज्यादा हुई
24 अक्टूबर 2026, चंडीगढ़: पंजाब में धान की सरकारी खरीद ने पकड़ी रफ्तार, एक हफ्ते में खरीद दोगुने से ज्यादा हुई – पंजाब में चालू खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के दौरान धान की सरकारी खरीद ने रफ्तार पकड़ ली है। राज्य की खरीद एजेंसियों के आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर की शुरुआत के एक हफ्ते के भीतर ही मंडियों में आवक और खरीद, दोनों दोगुने से ज्यादा बढ़ गए।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री लाल चंद कटारूचक ने 5 अक्टूबर को खरड़ मंडी में खरीद व्यवस्थाओं की समीक्षा के दौरान बताया था कि उस समय तक मंडियों में 3.83 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच चुका था, जिसमें से 3.44 लाख मीट्रिक टन की खरीद सरकारी एजेंसियां कर चुकी थीं। उन्होंने बताया कि किसानों के खातों में 188 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका था।
दो दिन बाद आंकड़ों में बड़ा उछाल
महज दो दिन बाद, 7 अक्टूबर को लुधियाना जिले की जगराओं मंडी में समीक्षा के दौरान मंत्री ने बताया कि मंडियों में आवक बढ़कर 8.50 लाख मीट्रिक टन हो गई थी और सरकारी एजेंसियों ने 7.50 लाख मीट्रिक टन धान खरीद लिया था। धान की खरीद 2,461 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर की जा रही है।
मंत्री ने यह भी बताया कि मंडियों में बारदाने (गट्टों) की कोई कमी नहीं है और राज्य सरकार ने सीजन को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरी व्यवस्था की है। उन्होंने आने वाले दिनों में उठान की रफ्तार और बढ़ाने का भरोसा दिलाया, ताकि मंडियों में धान का ढेर जमा न हो और किसानों को बार-बार चक्कर न काटने पड़ें।
पंजाब सरकार ने इस सीजन में केंद्रीय पूल के लिए करीब 180 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। राज्य की मंडियों में अक्टूबर-नवंबर के दौरान धान की आवक सबसे ज्यादा रहती है, इसलिए आने वाले हफ्तों में खरीद के आंकड़े और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
पंजाब देश के केंद्रीय अनाज भंडार में सबसे बड़ा योगदान देने वाले राज्यों में गिना जाता है, इसलिए यहां की खरीद प्रक्रिया पर पूरे उत्तर भारत की नजर रहती है। खरीद एजेंसियों को समय पर भुगतान और उठान सुनिश्चित करना इसलिए भी जरूरी होता है क्योंकि इसी राशि से किसान रबी सीजन की बुवाई के लिए बीज, खाद और अन्य जरूरी सामान खरीदते हैं।
गौरतलब है कि हरियाणा में भी इसी सीजन में धान खरीद का काम बड़े पैमाने पर चल रहा है, जहां अक्टूबर के मध्य तक मंडियों में आवक 21 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच चुकी थी। पड़ोसी राज्यों में समानांतर चल रही खरीद से इस बात का अंदाजा मिलता है कि उत्तर भारत की प्रमुख धान पट्टी में इस साल खरीद व्यवस्था किस रफ्तार से आगे बढ़ रही है। किसान संगठनों का कहना है कि अगर उठान और भुगतान की यही रफ्तार बनी रही, तो इस बार सीजन के आखिर तक मंडियां पहले से जल्दी खाली हो सकती हैं।
किसानों के लिए क्यों अहम है समय पर उठान
पंजाब की मंडियों से खरीदा गया धान केंद्रीय पूल में जाता है, जिसे बाद में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में मंडी से उठान जितनी तेजी से होता है, किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए जगह और समय उतनी ही जल्दी मिल जाता है।
बारिश या नमी ज्यादा होने की स्थिति में धान की खरीद में देरी होने का खतरा बना रहता है, क्योंकि तय मानकों से ज्यादा नमी वाला धान सीधे नहीं खरीदा जा सकता। ऐसे में किसानों को धान सुखाने के लिए अतिरिक्त समय और मेहनत खर्च करनी पड़ती है, जिससे मंडी तक पहुंचने में देरी हो सकती है।
खरीद एजेंसियां हर मंडी में नमी मापक यंत्रों और तौल की व्यवस्था पर भी नजर रखती हैं, ताकि किसानों को तौल में किसी तरह की दिक्कत न हो। किसान नेताओं का कहना है कि अगर भुगतान और उठान दोनों तय समय पर होते रहें, तो किसानों को साहूकारों से उधार लेने की जरूरत नहीं पड़ती और वे समय पर रबी फसल की बुवाई शुरू कर पाते हैं।
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