सोलन की पिंकी देवी ने हाइब्रिड टमाटर की खेती से कमाया 2.80 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा
24 अक्टूबर 2026, सोलन: सोलन की पिंकी देवी ने हाइब्रिड टमाटर की खेती से कमाया 2.80 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा – हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के कोठी गांव की पिंकी देवी ने सब्जी की खेती में हाइब्रिड किस्मों को अपनाकर अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा ली है। करम दास की पत्नी पिंकी देवी ने अपने करीब 2 एकड़ (10 बीघा) खेत में टमाटर, पोल बीन्स और शिमला मिर्च की मिश्रित खेती शुरू की थी।
उनकी खेती में बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने टमाटर की लोकप्रिय हाइब्रिड किस्म INDAM-13405 के 15 पैकेट बीज बोए। यह किस्म अनिश्चित बढ़वार (इनडिटरमिनेट) वाली है और इसके गोल-चपटे फल 90 से 100 ग्राम तक के होते हैं, जो बोने के 75 से 80 दिन में तैयार हो जाते हैं।
खर्च घटाकर मुनाफा बढ़ाया
फल मजबूत होने के कारण लंबी दूरी तक परिवहन में भी खराब नहीं होते, जिससे दूर की मंडियों तक भेजना आसान हो जाता है। पहाड़ी इलाकों में यह खासतौर पर अहम माना जाता है, क्योंकि यहां से मैदानी मंडियों तक पहुंचने में कई घंटे लग जाते हैं और कमजोर किस्म की फसल रास्ते में ही खराब हो सकती है।
पिंकी देवी के खेत से कुल 30 हजार किलोग्राम उपज निकली, जिसे करीब 1,200 क्रेट में बाजार तक पहुंचाया गया। इससे उन्हें कुल 4 लाख 80 हजार रुपये की आमदनी हुई। खेती में उनका कुल खर्च 2 लाख रुपये आया, जिसके बाद उन्हें 2 लाख 80 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ।
बागवानी विभाग के मुताबिक सही किस्म के चुनाव और बेहतर प्रबंधन से छोटे किसान भी कम जमीन में अच्छी कमाई कर सकते हैं। पिंकी देवी की यह उपलब्धि पहाड़ी इलाकों की उन महिला किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है जो सीमित जमीन और संसाधनों के बावजूद सब्जी की खेती से बेहतर आमदनी चाहती हैं।
कृषि विभाग के अधिकारी पिंकी देवी को महिला सशक्तिकरण और बेहतर खेती प्रबंधन की मिसाल के तौर पर पेश करते हैं। सोलन जिला हिमाचल प्रदेश में सब्जी उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है, जहां पहाड़ी ढलानों पर भी किसान टमाटर, शिमला मिर्च और फ्रांसबीन जैसी नकदी फसलें उगाकर अच्छी आमदनी हासिल कर रहे हैं।
पिंकी देवी की कहानी बताती है कि सही बीज और समय पर देखभाल मिलने पर यह आमदनी और भी बढ़ाई जा सकती है। कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि आसपास के किसान भी मिश्रित खेती और हाइब्रिड किस्मों को अपनाकर अपने खेत से मिलने वाली आमदनी बढ़ा सकते हैं, बशर्ते बीज की गुणवत्ता और बाजार की मांग को ध्यान में रखा जाए।
पहाड़ी खेती की चुनौतियों के बीच निकाला रास्ता
पहाड़ी इलाकों में खेती करना मैदानी क्षेत्रों जितना आसान नहीं होता। ढलान वाले खेत, सीमित सिंचाई संसाधन और मंडी तक पहुंचने में लगने वाला ज्यादा समय, ये सभी चुनौतियां किसानों की मेहनत का बड़ा हिस्सा खा जाती हैं। ऐसे में सही किस्म का चुनाव किसान के मुनाफे में बड़ा फर्क डाल सकता है।
पिंकी देवी बताती हैं कि पहले वे परंपरागत किस्मों पर ही निर्भर थीं, जिनकी उपज और भंडारण क्षमता सीमित रहती थी। हाइब्रिड किस्म अपनाने के बाद न केवल उपज बढ़ी, बल्कि फल जल्दी खराब न होने के कारण मंडी तक पहुंचाना भी आसान हो गया।
बागवानी विभाग के अधिकारी बताते हैं कि सोलन जिले में कई किसानों को अब हाइब्रिड और उन्नत किस्मों की जानकारी और बीज उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि पिंकी देवी जैसी सफलता की कहानियां दूसरे गांवों में भी दोहराई जा सकें।
पिंकी देवी की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने एक ही खेत में तीन अलग-अलग सब्जियां लगाकर जोखिम को बांट दिया। अगर किसी एक फसल का भाव मंडी में कम भी मिले, तो दूसरी फसल से होने वाली आमदनी से नुकसान की भरपाई हो जाती है। कृषि विशेषज्ञ इसे छोटी जोत वाले किसानों के लिए एक व्यावहारिक रणनीति मानते हैं, खासकर उन इलाकों में जहां मौसम और मंडी भाव, दोनों में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहता है।
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