राज्य कृषि समाचार (State News)

UP में कृषि ग्रेजुएट्स के लिए सुनहरा मौका: एग्री स्टार्टअप पर मिलेगा 5 लाख तक का लोन और फ्री ट्रेनिंग

07 जुलाई 2025, लखनऊ: UP में कृषि ग्रेजुएट्स के लिए सुनहरा मौका: एग्री स्टार्टअप पर मिलेगा 5 लाख तक का लोन और फ्री ट्रेनिंग –  उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि स्नातकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की है। “प्रशिक्षित कृषि उद्यमी स्वावलंबन योजना (एग्री-जंक्शन योजना)” के तहत युवा न केवल एग्री स्टार्टअप शुरू कर सकेंगे, बल्कि सरकार की ओर से उन्हें फ्री ट्रेनिंग, लाइसेंस फीस की भरपाई, और 5 लाख रुपये तक के लोन पर ब्याज सब्सिडी भी मिलेगी।

कौन कर सकता है आवेदन?

1. उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी हो
2. कृषि/उद्यान/पशुपालन/पशु चिकित्सा/मुर्गी पालन या संबंधित विषय में स्नातक (UG)
3. बेरोजगार हो
4. आयु सीमा: अधिकतम 40 वर्ष (SC/ST/महिला को 5 साल की छूट)

योजना के फायदे क्या हैं?

1. 13 दिन की निःशुल्क ट्रेनिंग- ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) द्वारा उद्यमिता, फाइनेंस और मार्केटिंग जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
2. ₹5 लाख तक बैंक ऋण पर ब्याज सब्सिडी- सरकार द्वारा ₹60,000 तक की अग्रिम ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। यदि ऋण 5 लाख से कम है, तो सब्सिडी भी उसी अनुपात में मिलेगी।
3. ₹12,000 तक किराया सहायता- स्टोर खोलने के लिए पहले साल ₹1,000 प्रति माह किराया सहायता मिलेगी।
4. बीज/उर्वरक बेचने के लाइसेंस की फीस सरकार देगी
5. लाइसेंस बनवाने पर लगने वाला शुल्क सरकार द्वारा रिइम्बर्स किया जाएगा।

जरूरी दस्तावेज

1. आधार कार्ड
2. जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
3. निवास प्रमाण पत्र
4. स्नातक की मार्कशीट
5. हाई स्कूल और इंटर की मार्कशीट
6. बैंक पासबुक
7. पैन कार्ड
8. शपथ पत्र (नोटरी से सत्यापित)

महत्वपूर्ण तिथि

आवेदन की अंतिम तिथि 20 जुलाई, 2025 है। इच्छुक युवा जल्द से जल्द http://agridarshan.up.gov.in या http://agriculture.up.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते है और योजना से जुड़ी अधिक जानाकारी प्राप्त कर सकते हैं।

कहां संपर्क करें?

अपने ज़िले के उप कृषि निदेशक कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें। योजना की जानकारी सम्बंधित अधिकारी के कार्यालय में कार्य दिवस पर व्यक्तिगत रूप से ली जा सकती है।

उद्देश्य क्या है?

1. कृषि स्नातकों को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर लाना।
2. किसानों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण बीज, खाद, रसायन उपलब्ध कराना।
3. ग्रामीण स्तर पर कृषि निवेश और जागरूकता को बढ़ावा देना।

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