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राज्य कृषि समाचार (State News)

सोयाबीन की बुवाई से लेकर जल निकास तक, कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को दिए अहम सुझाव

13 जुलाई 2026, भोपाल: सोयाबीन की बुवाई से लेकर जल निकास तक, कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को दिए अहम सुझाव – मध्यप्रदेश के गुना जिले में खरीफ सीजन के दौरान किसानों को फसल प्रबंधन संबंधी वैज्ञानिक सलाह देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों डॉ. एस.एस. धाकड़, डॉ. डी.के. तिवारी एवं डॉ. मुकेश सिंह ने ने सतगांव सप्टी, बाईहेड़ा और सुनेरा गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को सोयाबीन की बुवाई, बीज उपचार, जल निकास, खरपतवार नियंत्रण और कीट-रोग प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए, ताकि मौसम की परिस्थितियों के अनुसार फसलों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।

100 मिमी वर्षा के बाद करें सोयाबीन की बुवाई

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन किसानों ने अभी तक सोयाबीन की बुवाई नहीं की है, वे कम से कम 100 मिमी वर्षा होने के बाद ही बुवाई करें। विलंबित बुवाई की स्थिति में शीघ्र पकने वाली किस्मों का चयन करें। वहीं किसान 20 जुलाई तक उड़द एवं मूंग की बुवाई कर सकते हैं।

बीजोपचार और गैप फिलिंग पर दें विशेष ध्यान

किसानों को कम से कम 70 प्रतिशत अंकुरण क्षमता वाले गुणवत्तायुक्त बीज का उपयोग करने की सलाह दी गई है। साथ ही बुवाई से पहले बीज का फफूंदनाशी, कीटनाशी तथा जैव उर्वरक (राइजोबियम/पीएसबी) से बीजोपचार करने को कहा गया है। यदि सोयाबीन का अंकुरण कमजोर हो तो दोबारा बुवाई करें या आवश्यक पौध संख्या बनाए रखने के लिए सुविधानुसार कतारों में बीज डालकर गैप फिलिंग करें।

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खेत में जल निकास की रखें उचित व्यवस्था

वैज्ञानिकों ने बताया कि जिले में अच्छी वर्षा हो रही है। ऐसे में किसान खेतों में जल निकास की उचित व्यवस्था रखें। जहां संभव हो, वहां बीबीएफ (चौड़ी क्यारी), रिज-फरो अथवा रेज्ड बेड पद्धति से बुवाई करें, ताकि अधिक वर्षा या सूखे की स्थिति में फसल सुरक्षित रह सके।

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खरपतवार और कीट-रोगों की करें नियमित निगरानी

जिन खेतों में बुवाई के 15 से 20 दिन हो चुके हैं, वहां समय पर निंदाई-गुड़ाई करें। सोयाबीन फसल में कीट एवं रोग दिखाई देने पर कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही अनुशंसित दवाओं का प्रयोग करें। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्य करने तथा किसी भी समस्या की स्थिति में कृषि विज्ञान केंद्र अथवा निकटतम कृषि विभाग कार्यालय से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करने की सलाह दी है।

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