मूंग बीज से बीटी कॉटन तक ‘संदेशों का सिलसिला’
09 मार्च 2026, भोपाल: मूंग बीज से बीटी कॉटन तक ‘संदेशों का सिलसिला‘ – मूंग बीज से बीटी कॉटन तक ‘संदेशों का सिलसिल इंदौर (कृषक जगत)। प्रदेश में इन दिनों कृषि आदान कारोबार से जुड़े हलकों में तरह-तरह के ‘संदेशों की चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि मूंग के बीज से लेकर बीटी कॉटन के कारोबार से जुड़े लोगों तक इशारों-इशारों में अलग-अलग तरह के पैगाम पहुंचाए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार जिले के कुछ स्थानों पर निरीक्षण, सैंपलिंग और अन्य विभागीय प्रक्रियाओं के नाम पर कंपनियों को संकेत दिए जाने की बातें सामने आ रही हैं। व्यापारिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इन संकेतों के साथ ‘सैंपल की दहशत से मुक्ति जैसा माहौल बनाने की बात जोड़ी जा रही है। बताया जाता है कि इन पैगामों को कंपनियों तक पहुंचाने का काम कुछ तथाकथित ‘दरबारी किस्म के लोग कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जब इन संदेशों की कडिय़ां जोड़कर देखी जाती हैं तो बातचीत में अंतत: एक ही नाम बार-बार सामने आता है- ‘… भैया।
जब प्रदेश में ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026 मनाने की बात हो रही है, मुख्यमंत्री किसानों के लिए बोनस और नई योजनाएं ला रहे हैं, वहीं ‘मामाजी नए बीज अधिनियम के माध्यम से किसानों को उच्च कोटि का बीज उपलब्ध कराने का भरोसा जता रहे हैं। ऐसे समय में इस तरह के संकेतों और फुसफुसाहटों की चर्चा कृषि आदान कारोबार में कई तरह के सवाल खड़े कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज और कृषि आदान पहुंचाने की बात हो रही हो, तब इस तरह की स्थितियां पारदर्शिता और व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा और स्पष्टता आवश्यक मानी जा रही है।
‘जैसा बोओगे वैसा काटोगे
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