राज्य कृषि समाचार (State News)

राजस्थान में FPO को मिलेगा आसान बैंक लोन, कृषि अवसंरचना और वैल्यू चेन को मिलेगा बढ़ावा  

18 जुलाई 2026, जयपुर: राजस्थान में FPO को मिलेगा आसान बैंक लोन, कृषि अवसंरचना और वैल्यू चेन को मिलेगा बढ़ावा – राजस्थान सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPO) तथा कृषि मूल्य शृंखलाओं (एग्रीकल्चर वैल्यू चेन) को बेहतर बैंकिंग सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार के राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन (रीति) द्वारा शुक्रवार को योजना भवन में “कृषि मूल्य शृंखलाओं एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लिए बैंकिंग सहायता” विषय पर राज्य स्तरीय वर्चुअल कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में कृषि अवसंरचना, मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण और संस्थागत ऋण तक किसानों की आसान पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य कृषि अवसंरचना, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, लॉजिस्टिक्स और कृषि मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि करना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक सशक्त बनाना था। इस दौरान विशेषज्ञों ने एफपीओ और कृषि मूल्य शृंखलाओं के वित्तपोषण में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करते हुए संस्थागत ऋण प्रवाह बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

कृषि अवसंरचना में निवेश बढ़ाने पर जोर

कार्यशाला में कटाई उपरांत (पोस्ट हार्वेस्ट) अवसंरचना जैसे वेयरहाउस, कोल्ड चेन, ग्रेडिंग, छंटाई और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। इसके साथ ही फसल पैटर्न और बाजार की मांग के अनुरूप जिला-विशिष्ट ऋण योजनाएं तैयार करने, जलवायु अनुकूल कृषि अवसंरचना के लिए वित्तपोषण बढ़ाने तथा क्लस्टर आधारित और ‘एक जिला-एक उत्पाद (ODOP)’ मॉडल के अनुरूप वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि क्षेत्र में उपलब्ध अप्रयुक्त ऋण क्षमता का बेहतर उपयोग कर कटाई उपरांत अवसंरचना को मजबूत बनाया जा सकता है। इससे जिला-विशिष्ट कृषि मूल्य शृंखलाओं को मजबूती मिलेगी और कृषि आधारित उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा।

किसानों और FPO को मिली सरकारी योजनाओं की जानकारी

कार्यशाला में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) तथा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के अधिकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न ऋण-संबंधी योजनाओं की जानकारी दी। इनमें यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (PMFME), कृषि अवसंरचना निधि (AIF) तथा नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद (NWR) वित्तपोषण जैसी प्रमुख योजनाएं शामिल रहीं।

अधिकारियों ने बताया कि ULI के माध्यम से डिजिटल ऋण वितरण प्रणाली को गति मिलेगी, जिससे किसानों और एफपीओ के लिए ऋण स्वीकृति एवं वितरण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी।

डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता पर भी रहेगा फोकस

कार्यशाला में तकनीक आधारित डिजिटल ऋण मूल्यांकन प्रणाली और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म के विस्तार पर भी जोर दिया गया, ताकि किसानों और एफपीओ की संस्थागत वित्त तक पहुंच आसान हो सके। साथ ही किसान उत्पादक संगठनों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने, वित्तीय साक्षरता को मजबूत करने, हैंडहोल्डिंग सहायता और व्यवसाय विकास सेवाओं को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी।

इसके अलावा कृषि अवसंरचना निधि, पीएमएफएमई, एनडब्ल्यूआर वित्तपोषण सहित अन्य ऋण-संबंधी योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया गया।

‘विकसित राजस्थान-2047’ के लक्ष्य की दिशा में साझा संकल्प

कार्यशाला के समापन पर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, वित्तीय संस्थानों और किसान उत्पादक संगठनों ने कृषि अवसंरचना एवं कृषि मूल्य शृंखलाओं में निवेश बढ़ाने, संस्थागत ऋण प्रवाह को गति देने तथा किसानों की आय में वृद्धि के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। साथ ही ‘विकसित राजस्थान-2047’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग पर सहमति व्यक्त की गई।

इस राज्य स्तरीय वर्चुअल कार्यशाला में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नाबार्ड, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC), वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक, किसान उत्पादक संगठन (FPO) तथा अन्य प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

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