राज्य कृषि समाचार (State News)

ग्वालियर में हाईटेक नर्सरी का भूमिपूजन, CM मोहन यादव बोले- बहु फसल और पशुपालन से बढ़ेगी किसानों की आय

07 जुलाई 2026, ग्वालियर: ग्वालियर में हाईटेक नर्सरी का भूमिपूजन, CM मोहन यादव बोले- बहु फसल और पशुपालन से बढ़ेगी किसानों की आय – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की आय केवल एक फसल से नहीं, बल्कि बहु फसली खेती, प्राकृतिक खेती और उन्नत पशुपालन से बढ़ेगी। इसी सोच के साथ राज्य सरकार कृषि के साथ-साथ डेयरी, पशुपालन और बागवानी को भी बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री सोमवार को ग्वालियर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर आयोजित उन्नत कृषि संभागीय कार्यशाला में किसानों को संबोधित कर रहे थे।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से ग्वालियर के खुरैरी और ग्राम जहांगीरपुर में बनने वाली अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन के प्रथम चरण का रिमोट के माध्यम से भूमिपूजन किया। उन्होंने उद्यानिकी, मत्स्य पालन और कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को हितलाभ भी वितरित किए।

5 साल में डेयरी उत्पादन में नंबर-1 बनेगा मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन के मामले में देश में तीसरे स्थान पर है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में प्रदेश को डेयरी उत्पादन में देश का नंबर-1 राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि नेशनल डेयरी विकास योजना के तहत ग्वालियर दुग्ध संघ सहित साँची दुग्ध संघ को लगातार सहयोग दिया जा रहा है, जिससे दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

सिंचाई रकबा 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2003 में प्रदेश का सिंचाई रकबा केवल साढ़े सात लाख हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर लगभग 50 लाख हेक्टेयर हो चुका है। सरकार का लक्ष्य इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि चंबल-पार्वती-कालीसिंध और केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजनाओं से प्रदेश की सिंचाई क्षमता में बड़ा विस्तार होगा। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया।

कृषि ऋण चुकाने के लिए मिलेगा पूरा एक साल

मुख्यमंत्री ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि अब उन्हें 31 मार्च तक कृषि ऋण जमा करने की चिंता नहीं करनी होगी। सरकार ने ऋण चुकाने के लिए पूरे एक वर्ष का समय देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष के तहत सरकार खेती के साथ पशुपालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ किसानों की सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रख रही है।

गौशालाओं के विस्तार पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश में गौ संरक्षण और स्वदेशी नस्ल की गायों के संवर्धन को बढ़ावा दे रही है। नगरीय क्षेत्रों में पुरानी खिड़क (खिरक) प्रणाली को समाप्त कर बड़े स्तर पर गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं। ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला की तर्ज पर इंदौर, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में भी बड़ी गौशालाएं विकसित की जा रही हैं।

किसानों ने साझा किए प्राकृतिक खेती के अनुभव

कार्यशाला में कई प्रगतिशील किसानों ने प्राकृतिक खेती के अपने अनुभव साझा किए। ग्वालियर जिले के बिलौआ निवासी किसान प्राण सिंह माथुर ने बताया कि उन्होंने प्राकृतिक खेती के माध्यम से अमरूद की “बिलौआ-22” और “बिलौआ-रेड” किस्म विकसित की है, जिन्हें वैज्ञानिक मान्यता और पेटेंट मिल चुका है। उन्होंने अब तक 50 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण भी दिया है।

वहीं देवरा गांव के किसान बृजेंद्र रावत ने बताया कि उन्होंने रासायनिक खेती छोड़कर पूरी तरह प्राकृतिक खेती अपनाई है। उनकी पत्नी को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पांच पुरस्कार मिल चुके हैं। भगवानपुरा मुरार के किसान देवराज कुशवाह ने बताया कि वे प्राकृतिक तरीके से गेहूं, सरसों, भिंडी, मिर्च और आलू की खेती कर बेहतर उत्पादन ले रहे हैं।

आधुनिक खेती के दो मॉडल का लोकार्पण

मुख्यमंत्री ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय परिसर में समन्वित कृषि प्रणाली इकाई और बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई का भी लोकार्पण किया। समन्वित कृषि प्रणाली में फसल उत्पादन के साथ बागवानी, डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और जैविक खाद निर्माण को एक साथ जोड़ा गया है, जिससे एक गतिविधि का अपशिष्ट दूसरी गतिविधि के लिए उपयोगी बनता है और किसानों की लागत कम होती है।

वहीं बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई में एक ही खेत में अलग-अलग ऊंचाई वाली फसलों का वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन किया जाएगा, जिससे भूमि, पानी और पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग होगा और किसानों को एक ही खेत से सालभर कई फसलों से आय मिल सकेगी।

पौधारोपण और हेलमेट भी बांटे

मुख्यमंत्री ने कृषि विश्वविद्यालय परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत आम का पौधा लगाया और अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया। इसके अलावा सड़क सुरक्षा अभियान के तहत करीब 50 लोगों को हेलमेट वितरित किए और सभी से हेलमेट पहनकर वाहन चलाने की अपील की।

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