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राज्य कृषि समाचार (State News)

खेतों से बदली किस्मत: भोपाल में प्राकृतिक खेती से महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, अन्य किसानों के लिए बनीं मिसाल

17 मार्च 2026, भोपाल: खेतों से बदली किस्मत: भोपाल में प्राकृतिक खेती से महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, अन्य किसानों के लिए बनीं मिसाल – भोपाल जिले में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन महिलाओं को विशेष रूप से प्रोत्साहित कर रहा है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देशन में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती इला तिवारी और उप संचालक कृषि श्रीमती सुमन कुमार जिले की ग्राम पंचायतों में भ्रमण कर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को प्राकृतिक खेती के लाभ और तकनीक से अवगत करा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य न केवल रसायन मुक्त फल, फूल, सब्जियां और अनाज नागरिकों तक पहुंचाना है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है।

प्रगतिशील महिला किसान का प्रेरक सफर

भोपाल जिले के तीन गांव—कोलूखेड़ी, सेमरीकलां और नलखेड़ा में लगभग 100 महिलाएं प्राकृतिक खेती कर रही हैं, जिनमें से लगभग 30 महिलाएं लखपति बन चुकी हैं। इसी श्रेणी की एक मिसाल हैं ग्राम पंचायत कोलूखेड़ी की सिंगल मदर किसान श्रीमती विनीता प्रजापति। उन्होंने पांच साल पहले अपने घर में किचन गार्डन से प्राकृतिक सब्जियां उगाना शुरू किया।

विनीता प्रजापति ने एनआरएलएम के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी आजीविका को सशक्त बनाया। वर्ष 2023 में उन्होंने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, तिरुपति में प्रशिक्षण प्राप्त किया और भोपाल जिले की प्राकृतिक खेती मास्टर ट्रेनर बन गईं। आज वह बैरसिया ब्लॉक में अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देती हैं और स्वयं 2 एकड़ में सब्जियां, गेहूं और चना उगाकर राग भोपाली जैसे प्राकृतिक खेती बाजारों में बेच रही हैं।

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प्राकृतिक खेती से बढ़ी आय और पहचान

श्रीमती प्रजापति की पहल से प्रेरित होकर उनके गांव और आस-पास के 4-5 अन्य गांवों की लगभग 100 महिलाएं प्राकृतिक खेती कर रही हैं। वे स्थानीय हाट-बाजारों के माध्यम से रसायन मुक्त सब्जियां, गेहूं, चना और अन्य खाद्य उत्पाद बेचकर अच्छी आय कमा रही हैं।

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प्राकृतिक खेती अपनाने से पहले ये महिलाएं परंपरागत तरीके से रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक का उपयोग करती थीं। समय के साथ लागत बढ़ने और मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होने के कारण उन्होंने प्राकृतिक खेती की ओर रुख किया। विनीता प्रजापति ने नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत विभिन्न संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त कर बीजामृत, जीवामृत, पंचगव्य, निर्मास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक घोल बनाना और खेत में प्रयोग करना सीखा।

प्राकृतिक खेती से महिलाओं को सशक्तिकरण

श्रीमती प्रजापति की पहल से प्रेरित होकर उनके गांव और आस-पास के 4-5 अन्य गांवों की लगभग 100 महिलाएं प्राकृतिक खेती कर रही हैं। वे स्थानीय हाट-बाजारों के माध्यम से रसायन मुक्त सब्जियां, गेहूं, चना और अन्य खाद्य उत्पाद बेचकर अच्छी आय कमा रही हैं।

प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। राज्य सरकार ने क्लस्टर स्थापित करके सुनिश्चित किया है कि मध्यप्रदेश जैविक खेती में अग्रणी बने। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्राकृतिक खेती के क्षेत्रफल को बढ़ाने के प्रयास निरंतर जारी हैं।

महिलाओं के लिए प्रेरणा और मॉडल

विनीता प्रजापति और अन्य महिलाओं की कहानी यह दिखाती है कि प्राकृतिक खेती केवल स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए लाभकारी नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह मॉडल जिले की अन्य महिलाओं और किसानों के लिए प्रेरणा बन चुका है।

शासन की कृषि, उद्यानिकी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास योजनाएं, दीनदयाल अंत्योदय योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं को सशक्त बनाने में सहायक साबित हो रही हैं। प्राकृतिक खेती के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ी है और उन्हें स्थानीय समाज में विशेष पहचान भी मिली है।

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