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राज्य कृषि समाचार (State News)

रबी की तैयारी में जल संकट पर फोकस, बागवानी से बढ़ेगी किसानों की आय

एपीसी की संभागीय समीक्षा बैठक में उर्वरक गुणवत्ता, फसल विविधीकरण, पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के निर्देश

30 अक्टूबर 2026, उज्जैन: रबी की तैयारी में जल संकट पर फोकस, बागवानी से बढ़ेगी किसानों की आय – कृषि उत्पादन आयुक्त के.सी. गुप्ता की अध्यक्षता में उज्जैन में रबी फसल नियोजन एवं खरीफ की संभागीय समीक्षा बैठक हुई। इसमें कम वर्षा को देखते हुए कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने, किसानों को सहकारिता विभाग की कवच योजना का लाभ दिलाने तथा उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाकर आय में वृद्धि करने पर जोर दिया गया।

गुप्ता ने कहा कि उद्यानिकी फसलों से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और प्रोत्साहन दिया जाए। उद्यानिकी क्लस्टरों के साथ फूड प्रोसेसिंग यूनिट, कोल्ड चेन और साझा विपणन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए गए। उज्जैन जिले में कट फ्लावर एवं फ्लावर क्लस्टर के लिए 65 गांवों में लगभग 3,000 एकड़ क्षेत्र विकसित करने की प्रक्रिया जारी है।

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58 प्रतिशत बोवनी, कम पानी वाली फसलों पर जोर

किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत बरबड़े ने बताया कि प्रदेश और संभाग में खाद एवं प्रमाणित बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। संभाग में अब तक 58 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है। कम वर्षा के कारण गेहूं के विकल्प के रूप में सरसों, मसूर और अलसी जैसी कम पानी वाली फसलों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए। ई-टोकन से उर्वरक वितरण, खाद भंडारण तथा प्रमाणित बीज की उपलब्धता पर निगरानी रखने को कहा गया।

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उर्वरक, बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा मंदसौर, नीमच और आगर-मालवा में नकली खाद पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वर्ष 2026-27 में संभाग के 23,64,307 ऋणी और 18,210 अऋणी किसानों का फसल बीमा किया गया है।

नरवाई जलाने पर सख्ती

फसल अवशेष जलाने पर रोक के लिए अग्रिम कार्ययोजना बनाने और हार्वेस्टर में कटर अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश दिए गए। नियमों का उल्लंघन करने वाले हार्वेस्टरों पर कार्रवाई करने तथा नरवाई को आय का साधन बनाने के लिए किसानों को जागरूक करने पर जोर दिया गया। मंडियों में तकनीक का उपयोग बढ़ाने और प्रत्येक जिले में एक मंडी को हाईटेक बनाने की बात भी कही गई।

पशुपालन और मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा

दूसरे सत्र में प्रमुख सचिव पशुपालन सुदाम खाड़े ने नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, पशु टीकाकरण और पौष्टिक चारे के उत्पादन पर जोर दिया। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के तहत दो उन्नत दुधारू भैंसों की इकाई लागत 2.95 लाख रुपये है। सामान्य वर्ग को 50 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।

वृंदावन ग्राम योजना, गौशालाओं के पंजीयन, साइलेज इकाइयों और दुग्ध सहकारी समितियों के विस्तार की भी समीक्षा की गई। मत्स्य पालन क्षेत्र में एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के तहत केज कल्चर, निजी निवेश, मत्स्य निर्यात और स्मार्ट फिश पार्लर को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में सहकारिता, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, संभागायुक्त, कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों ने भाग लिया।

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