सोया उद्योग के विस्तार से किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य तेल आत्मनिर्भरता पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में प्रसंस्करण, निवेश और रोजगार को बताया विकास का आधार
18 अक्टूबर 2026, इंदौर: सोया उद्योग के विस्तार से किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य तेल आत्मनिर्भरता पर जोर – मध्य प्रदेश में सोया उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विस्तार से किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उपज का मूल्य संवर्धन करने और खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की संभावनाओं को नई दिशा मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) द्वारा आयोजित दो दिवसीय 9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में इन प्राथमिकताओं पर जोर दिया।

किसानों को बेहतर मूल्य, उद्योगों को नए अवसर – मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सोयाबीन उत्पादन और कृषि आधारित उद्योगों की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। मालवा सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है। आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण, उत्पादों की गुणवत्ता और विविधीकरण तथा बाजार विस्तार से सोयाबीन क्षेत्र की संभावनाओं का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विस्तार से कृषि उपज का मूल्य संवर्धन, भंडारण और विपणन मजबूत हो सकता है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावनाएं हैं।
निवेश और औद्योगिक विकास पर जोर – डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार कृषि, उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण और एमएसएमई सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में क्षेत्रीय औद्योगिक संभावनाओं को ध्यान में रखकर आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से स्थानीय संसाधनों के उपयोग और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने खाद्य तेल उद्योग को भारत की आत्मनिर्भरता और प्रोटीन आधारित पोषण व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया।
सोया उद्योग के प्रतिनिधियों का सम्मान – मुख्यमंत्री ने सोयाबीन उद्योग में उत्कृष्ट योगदान देने वाली कंपनियों और उनके प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में सोपा के चेयरमैन श्री नरेश गोयनका ने स्वागत भाषण दिया।
इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट और महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे। मंच पर सोपा के पूर्व अध्यक्ष श्री डेविश जैन, डिप्टी चेयरमैन श्री गिरीश मतलानी, कार्यकारी निदेशक श्री डी.एन. पाठक, एमएसपी, फसल विविधीकरण एवं प्राकृतिक खेती संबंधी उच्च स्तरीय समिति के सदस्य श्री कृष्ण वीर चौधरी तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद के प्रोफेसर एवं कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विजय पाल शर्मा मौजूद रहे।
वैश्विक बाजार में भारतीय सोया क्षेत्र की मजबूती पर चर्चा – कॉन्क्लेव का मुख्य विषय “आत्मनिर्भर भारत – पावरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन” रहा। इसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में उद्योग प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं, कृषि वैज्ञानिकों, उद्यमियों और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। आयोजन में सोयाबीन एवं खाद्य तेल क्षेत्र की बाजार संभावनाओं, प्रसंस्करण तकनीक और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सोयाबीन की उत्पादकता बढ़ाने, प्रसंस्करण क्षमता विकसित करने और बाजार से बेहतर जुड़ाव बनाने पर ध्यान देने से किसानों, उद्योगों और उपभोक्ताओं—तीनों को लाभ पहुंचाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
सोपा के अध्यक्ष श्री नरेश गोयनका, उपाध्यक्ष श्री गिरीश मतलानी और कार्यकारी निदेशक श्री डी.एन. पाठक ने मीडिया से चर्चा में जीएम सोयाबीन के आयात पर रोक जारी रखने तथा सोयाबीन बीज के आयात की अनुमति नहीं देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सस्ते विदेशी सोयाबीन से भारतीय किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं और खाद्य तेल व प्रोटीन के लिए विदेशी निर्भरता बढ़ सकती है। उन्होंने घरेलू सोयाबीन उत्पादन को बढ़ावा देने, स्थिर आयात शुल्क नीति अपनाने तथा मंडी टैक्स समाप्त करने की भी मांग की।
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