MP में खाद वितरण व्यवस्था बदली, अब किसान खुद जनरेट कर सकेंगे टोकन; उपलब्धता और रिटेलर की भी मिलेगी जानकारी
20 अगस्त 2026, भोपाल: MP में खाद वितरण व्यवस्था बदली, अब किसान खुद जनरेट कर सकेंगे टोकन; उपलब्धता और रिटेलर की भी मिलेगी जानकारी – मध्यप्रदेश में किसानों को उनकी जरूरत और पसंद के अनुसार आसानी से उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने ‘ई-विकास 2.0’ (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत राज्य के डबल लॉक केंद्रों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स), एमपी एग्रो और निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से उर्वरक का वितरण किया जा रहा है। किसानों के लिए पोर्टल को सरल और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे उर्वरक खरीद की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान होगी।
किसान अपनी जरूरत के अनुसार खरीद सकेंगे खाद
‘ई-विकास 2.0’ के तहत किसानों को अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार उर्वरक खरीदने की स्वतंत्रता दी गई है। किसान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की फसलवार अनुशंसित मात्रा या उससे अधिक उर्वरक पहली बार में ही प्राप्त कर सकेंगे। अतिरिक्त उर्वरक की मांग के लिए पहले 50 शब्दों में विवरण देना जरूरी था। अब इस प्रक्रिया को आसान करते हुए ड्रॉप-डाउन चयन की सुविधा दी गई है। जमीन के क्षेत्रफल के आधार पर उर्वरक की गणना भी अब सीधे प्रति हेक्टेयर बैग के रूप में प्रदर्शित होगी।
किसान खुद जनरेट कर सकेंगे खाद का टोकन
नई व्यवस्था में किसान उर्वरक के लिए स्वयं ई-टोकन जनरेट कर सकेंगे। इसके साथ ही पोर्टल के माध्यम से अधिकृत रिटेलर और उर्वरक की उपलब्धता से जुड़ी जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी। किसान यह भी जान सकेंगे कि उर्वरक का उठाव कब करना है और टोकन कितने समय तक वैध रहेगा। यदि कोई किसान ई-टोकन जनरेट करने के बाद उसे निरस्त करना चाहता है, तो टोकन जारी होने के 24 घंटे बाद पोर्टल पर टोकन निरस्तीकरण का विकल्प उपलब्ध रहेगा।
आपात स्थिति में 48 घंटे में होगा अनुमोदन
फसल क्षति या अन्य असाधारण परिस्थितियों में किसानों द्वारा दोबारा उर्वरक की मांग के लिए एक्सेप्शनल हैंडलिंग व्यवस्था को भी सरल किया गया है। ऐसे मामलों में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) या तहसीलदार को 48 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से अनुमोदन देना होगा।
WhatsApp पर मिलेगी खाद से जुड़ी जानकारी
ई-विकास 2.0 पोर्टल में जल्द ही WhatsApp बॉट की सुविधा शुरू की जाएगी। इसके जरिए किसान अपने मोबाइल से WhatsApp पर ‘हेल्प’ या ‘मदद’ लिखकर उर्वरक टोकन, अधिकृत रिटेलर, उर्वरक की उपलब्धता, उठाव की तारीख और टोकन की वैधता से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। मार्कफेड के डबल लॉक केंद्रों पर भीड़ और परेशानी कम करने के लिए जरूरत के अनुसार प्रतिदिन 300 से अधिक टोकन जनरेट करने की क्षमता बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।
समस्या के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर +91-7880223344 एक्टिव किया गया है। इस नंबर पर प्रत्येक शासकीय कार्य दिवस में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा, 20 अगस्त 2026 से पूरे प्रदेश में विशेष अभियान शुरू किया गया है। इसमें सभी किसानों की फार्मर आईडी बनाने, अग्रिम उर्वरक उठाव को प्रोत्साहित करने और पैक्स की सदस्यता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में खाद का स्टॉक
राज्य शासन के अनुसार प्रदेश के सभी जिलों में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त और निर्बाध भंडारण उपलब्ध है। चालू खरीफ वर्ष में 1 अप्रैल से अब तक प्रदेश में 17.57 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध हुआ है। इसमें से 13.18 लाख मीट्रिक टन का उठाव किसान कर चुके हैं, जबकि 4.39 लाख मीट्रिक टन यूरिया अभी उपलब्ध है।
इसी तरह डीएपी और एनपीके की कुल उपलब्धता 11.43 लाख मीट्रिक टन रही है। इसमें से 7.23 लाख मीट्रिक टन का उठाव हो चुका है और 4.20 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 3.17 लाख मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) भी वितरण के लिए उपलब्ध है। नई ‘ई-विकास 2.0’ व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है।
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