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राज्य कृषि समाचार (State News)

नैनो डीएपी के उपयोग से किसानों को कम लागत में मिलेगा बेहतर उत्पादन : मंत्री श्री नेताम

27 मई 2026, रायपुर: नैनो डीएपी के उपयोग से किसानों को कम लागत में मिलेगा बेहतर उत्पादन : मंत्री श्री नेताम – पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ सीजन के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। राज्य में वर्तमान में 9.29 लाख मीट्रिक टन रासायनिक खाद का स्टॉक गोदामों और समितियों में उपलब्ध है, जो निर्धारित लक्ष्य का करीब 60 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित किया है, जो पिछले वर्ष की खपत से 93 हजार मीट्रिक टन अधिक है।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि संभावित उर्वरक संकट को देखते हुए नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों जैसे एनपीके, हरी खाद, जैविक खाद और नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक किया जा रहा है।

नैनो डीएपी से कम लागत में बेहतर उत्पादन का दावा

कृषि विभाग के अनुसार नैनो डीएपी फॉस्फोरस और नाइट्रोजन युक्त उन्नत तरल उर्वरक है, जिससे संतुलित पोषण, बेहतर उत्पादन और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जहां 50 किलो पारंपरिक डीएपी पर करीब 1350 रुपए खर्च होते हैं, वहीं 25 किलो डीएपी और 500 मिली नैनो डीएपी के संयुक्त उपयोग से लगभग 1275 रुपए की लागत आती है।

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विभाग ने किसानों को नैनो डीएपी के वैज्ञानिक उपयोग की सलाह भी दी है। बीज उपचार, पौध उपचार और फसल रोपाई के बाद छिड़काव के लिए अलग-अलग मात्रा निर्धारित की गई है ताकि उर्वरकों का संतुलित उपयोग हो सके।

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कालाबाजारी रोकने के निर्देश, खाद वितरण पर नजर

कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि सभी जिलों में खाद वितरण व्यवस्था की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों के गठन के निर्देश दिए गए हैं। गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार ने दलहन-तिलहन और उद्यानिकी फसलों को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। शासन ने किसानों से वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर नैनो डीएपी और आधुनिक उर्वरक प्रबंधन तकनीकों का उपयोग करने की अपील की है, ताकि खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन भी बढ़ सके।

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