राज्य कृषि समाचार (State News)

किसान कल्याण वर्ष 2026: उज्जैन में प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और सूक्ष्म सिंचाई पर जोर

17 जुलाई 2026, उज्जैन: किसान कल्याण वर्ष 2026: उज्जैन में प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और सूक्ष्म सिंचाई पर जोर –  कलेक्टर रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को प्रशासनिक संकुल भवन में किसान कल्याण वर्ष-2026 के अंतर्गत जिला कृषि विकास योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्रेयांस कूमट, उप संचालक कृषि यू.एस. तोमर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में प्राकृतिक खेती के विस्तार, फसल विविधीकरण, कृषि यंत्रीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, जल संरक्षण तथा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को किसान हितैषी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्राकृतिक खेती के लिए बनेगी क्लस्टर आधारित कार्ययोजना

बैठक में बताया गया कि प्राकृतिक उत्पादों की बिक्री के लिए जिले में साप्ताहिक हाट बाजार शुरू किए जाएंगे, जिससे किसानों को सीधे बाजार मिलेगा और उपभोक्ताओं को शुद्ध प्राकृतिक उत्पाद उपलब्ध होंगे। वर्ष 2026-29 के लिए क्लस्टर आधारित कार्ययोजना तैयार की गई है। वर्तमान में जिले के 125 किसान 155 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।

सोयाबीन के विकल्प के रूप में अन्य फसलों को बढ़ावा

खरीफ सीजन में सोयाबीन पर निर्भरता कम करने के लिए मक्का, मूंग, उड़द, अरहर, तिल और मूंगफली की खेती बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार, खेती का जोखिम कम होने और किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है।

रेज्ड बेड तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन

जिले में रेज्ड बेड विधि से सोयाबीन की बुवाई को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस तकनीक से 15 से 20 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ता है तथा सूखे की स्थिति में भी फसल सुरक्षित रहती है।

वेजिटेबल सोयाबीन बना किसानों के लिए नया अवसर

विश्व वेजिटेबल सोयाबीन संस्था के सहयोग से घट्टिया विकासखंड के चार गांवों में 68 हेक्टेयर क्षेत्र में एनआरसीएस-188 किस्म की वेजिटेबल सोयाबीन की खेती की जा रही है। इसकी फलियां सब्जी के रूप में करीब 400 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही हैं। इसका स्वाद मटर जैसा बताया गया है। यह परियोजना फिलहाल उज्जैन, इंदौर और जबलपुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित है। कलेक्टर ने इस नवाचार के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए।

सूक्ष्म सिंचाई का बड़ा लक्ष्य

जिले में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का दायरा बढ़ाने के लिए तीन वर्षीय योजना तैयार की गई है। वर्तमान में 1,211 हेक्टेयर क्षेत्र सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत है, जिसे बढ़ाकर 2026-27 में 5,000 हेक्टेयर तथा 2027-28 में 8,000 हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे 50-60 प्रतिशत पानी की बचत और 25-30 प्रतिशत तक उत्पादकता बढ़ने का अनुमान है।

छोटे किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र

कस्टम हायरिंग सेंटरों के माध्यम से छोटे किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिले में 10 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। इससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार और कौशल प्रशिक्षण भी मिलेगा।

बलराम तालाब और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा

बलराम तालाब योजना के तहत सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ मछली पालन को भी अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में विकसित किया जाएगा। अगले वर्ष 24 नए तालाब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं प्याज सहित अन्य फसलों में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि किसानों को बाजार और मूल्य की बेहतर सुरक्षा मिल सके।

बी फसलों से बेहतर आय

बैठक में बताया गया कि रबी सीजन में मूंग और चना जैसी फसलों से किसानों को प्रति एकड़ 85 हजार से 95 हजार रुपये तक का लाभ प्राप्त हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन फसलों को अच्छा प्रतिसाद मिला।

बैठक के अंत में खरीफ-2026 की बुवाई की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जिले में सोयाबीन सहित अन्य फसलों की बुवाई संतोषजनक प्रगति पर है। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने निर्देश दिए कि किसान कल्याण योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र किसान तक पहुंचे, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिले और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए।

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